मिलों ने शर्टिंग की नई रेंज बाजार में उतारी, डार्क कलर पर जोर


फैंसी में लिनन, गीजा कॉटन, मोडाल, शेमरे,ट्विल
साटिन जैसे फैशनेबल कपड़ों पर दांव लगाया

मुंबई/ रमाशंकर पाण्डेय
साटीन में रिटेलर्स से लेकर उत्पादकों तक इस समय व्यापक तैयारी चल रही है। रिटेलर्स अब नये माल को अपनी दुकानों में भरने को सुसज्ज हैं, कारण कि एंड ऑफ  सीजन की सेल भी अंतिम चरण में है और एकाध दो दिनों के बाद यह बंद हो जाएगी। अधिकतर पुराने स्टॉक निकल चुके हैं कोरोना का अब कोई डर नहीं है। 
बाजार पूरी तरह से खुल चुके हैं। बाजार में रिकवरी शुरू होने के बाद संगठित क्षैत्र के रिटेलर्स अपना स्टॉफ  बढ़ाने लगे हंै। आगे की सीजन का मौका कोई भी खोना नहीं चाहता है। इस वर्ष देश में बारिश अच्छी होने तथा त्यौहारों की भरपूर सीजन के साथ ही वैवाहिक सीजन है और कच्चे माल के भाव घटे हंै, जो अच्छी बिक्री का संकेत दे रहे हैं। इतना ही नहीं, गारमेण्ट और कपड़ों के आयोजित किए गए मेले को व्यापरियों का अच्छा रिस्पासं मिला है। मिलों की आयोजित कॉन्फ्रेंस में भी भरपूर काम हुए हैं। 
इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए 15 अगस्त के बाद कपड़ों के साथ गारमेण्ट में बिक्री की एक अच्छी सीजन शुरू होने जा रही है। चिंता सिर्फ  इस बात की है कि सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, इससे रिटेलर्स और गारमेण्ट उत्पादकों को पैकिंग की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। फि निश्ड कपड़ों के भाव को लेकर जो अनिश्चितता बनी हुई थी, वह अब खत्म होती नजर आ रही है। इनके भाव बहुत अधिक बढऩे की संभावना नहीं होने से कपड़ों और गारमेण्ट का उठाव बढ़ सकता है। बांग्लादेश का गारमेण्ट उद्योग चरमराने लगा है। उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश के निर्यात में गार्मेंट का 85 प्रतिशत के करीब योगदान है। इतना ही नहीं, बांग्लादेश विदेशी आयातकों एवं बड़े रिटेल स्टोर्स चैन के लिए एक महत्वपूर्ण सप्लाई चैन माना जाता है, लेकिन बांग्लादेश की अर्थव्यस्था के डांवाडोल होते ही इस उद्योग के सामने समस्याएं आ रही है। दूसरी ओर क्रिसिल रेटिंग एजेंसी के अनुसार इस वित्त वर्ष में टेक्सटाइल बिजनेस की तुलना में संगठित क्षैत्र के बड़े रिटेलर्स की वृद्धि दर 25 से 30 प्रतिशत के बीच रह सकती है, जबकि छोटे एवं मझोले रिटेलर्स की वृद्धि दर 10 से 15 प्रतिशत की होगी। रिटेल कंपनियों की परिचालन मार्जिन 1.75 से 2 प्रतिशत से बढ़कर 7.7 से 8 प्रतिशत हो सकता है। 
नेशनल गारमेण्ट फेयर के सफ ल होने के बाद गारमेण्ट इकाईयों की इंटरलाइनिंग की मांग में भारी वृद्धि हुई है, इसमें कुछ मिलों के माल की मांग बहुत अधिक बढ़ी है। चीन से कॉटन और पोलिएस्टर लेज का आयात बड़े पैमाने पर किया जाता है, लेकिन आयातित माल के भाव पिछले छह से आठ महिने में करीब 30 प्रतिशत बढ़े हैं। आयातित माल की प्रतिस्पर्धा में बुरहानपुर में इंटरलाइनिंग का उत्पादन बहुत अच्छा हो रहा है, जिसकी बिक्री साउथ और उत्तर भारत की ओर अधिक है। गारमेण्ट उत्पादन का बेस अब बहुत व्यापक हो चुका है। नये शहरों के बसने और नये मॉल खुलने से गारमेण्ट की बिक्री के साथ उत्पादन का बेस लगातार बढ़ रहा है। बड़े ब्रांड भी इन केंद्रों पर ध्यान देने लगे हैं। 
आगे की सीजन सर्दी की होने से डार्क कलर कपड़ों की मांग अधिक रहने से इन दिनों जोर ऐसे कपड़ों का उत्पादन करने पर है, जिनका उपयोग रिटेल स्टोर्स में बिक्री के साथ गारमेण्ट में किया जा रहा है। कई मिलों की शर्टिंग की नई रेंज बाजार में उतारी गई है। इनमें लीनन, गीजा कॉटन, बाम्बू, मोडाल, शेमरे, ट्वील, साटीन इत्यादि फैशनेबल कपड़ों को शामिल किया गया है। वीमेंस ब्रांड की गो फैशन इंडिया लि. की योजना हर वर्ष  120 से 130 स्टोर अपने बेड़े में शामिल करने की है। कहा जा रहा है कि ब्रांडेड वीमेंस बोटम मार्केट का करीब आठ प्रतिशत हिस्से पर इस कंपनी का कब्जा है। वीमेंस में फैशन बदलाव के साथ नये उत्पादों के लिए असीम संभावनाएं बताई जा रही है। 
 


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