भारी भाव वृद्धि को पचा गया बाजार

नई दिल्ली/ वैवाहिक सीजन की जोरदार मांग और सीमित स्टॉक के कारण दिल्ली कपड़ा बाजार में बढ़े भाव पर भी अच्छी मांग बनी रही और भाव  वृद्धि बाजार पूरी तरह पचा गया। दिल्ली बाजार में गत पखवाड़े अच्छी वैवाहिक ग्राहकी देखने को मिली और यही कारण है कि बाजार हाल की लगभग पूरी भाव वृद्धि को पचा गया है, हालांकि ऊंचे भाव पर व्यापारी स्टॉक में सर्तकता बरत रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि गत 6-7 महीनों से बाजार में कपड़े भाव में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और वृद्धि का आलम यह है कि जहां संगठित क्षेत्र के कपड़ा निर्माता लगभग हर माह भाव बढ़ा रहे हैं, वहीं असंगठित क्षेत्र के निर्मात हर नए ऑर्डर में भाव बढ़ा देते हैं। 
वस्तुत: दो वर्ष के बाद स्थिति लगभग सामान्य होने के कारण सामाजिक और आर्थिक गतिविधियां बढ़ रही हैं और इससे कपड़े की मांग में सुधार हो रहा है।
स्टॉक कम- हालांकि बाजार भाव वृद्धि को लगभग पचा गया है, लेकिन स्टॉक की कमी महसूस की जा रही है। जहां निर्माता नित सिंथेटिक और कॉटन यार्न के बढ़ते भाव के कारण सीमित उत्पादन कर रहे हैं वहीं व्यापारी भी अपने पास सीमित स्टॉक रख रहे हैं, जबकि खुदरा में ग्राहकी जोरदार बनी हुई है। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष अप्रैल और मई में 
काफी संख्या में वैवाहिक तिथियां होने के साथ ही सामान्य होती स्थितियों में शादियों में रौनक बढऩे लगी है और कपड़े की मांग सुधार हो रहा है।
कुछ माह पूर्व तक कोविड-19 के कारण शादियों में मेहमानों की संख्या सीमित होती थी और इससे नए कपड़ों की मांग भी नहीं आ रही थी, लेकिन अब स्थिति बदलती जा रही है। आगामी महीनों में ईद का त्यौहार भी है और अनेक तीज-त्यौहार भी हैं। व्यापारियों को आशा भी है कि कपड़े की मांग अधिक रहेगी, लेकिन वे अपने पास स्टॉक रखने का जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं।
उल्लेखनीय है कि कुछ महिनों के दौरान विश्व बाजार में कच्चे तेल के भाव में भारी तेजी आई है और भाव कई वर्ष के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं। कपड़ा निर्माताओं का कहना है कि कच्चे तेल के भाव में वृद्धि के कारण यार्न के भाव में बढ़ोतरी तो हुई ही है, उनके अन्य खर्च भी बढ़ गए हैं जिससे कपड़े के उत्पादन लागत बढ़ रही है। यार्न में बढ़ोतरी के साथ ही वीविंग और प्रोसेसिंग से लेकर पेकिंग और माल भाड़े तक में बढ़ोतरी हो  चुकी है। इसी प्रकार कॉटन के भाव में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है और गत वर्ष की तुलना में भाव डबल हो गए हैं। हालांकि सरकार ने कॉटन के आयात पर ड्यूटी समाप्त कर दी है, लेकिन इसका घरेलू बाजार में कॉटन के भाव में अभी तक कोई खास कमी नहीं आई है। कॉटन यार्न के भाव लगभग पूर्व स्तर पर ही हैं। कपड़ा चाहे कोई भी हो, भाव सभी के बढ़े हैं। एक अनुमान के अनुसार गत 6 महिनों के दौरान विभिन्न प्रकार के फैब्रिक के भाव में 25-30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है।
सूत्रों के अनुसार बाजार में स्टॉक कम होने के साथ ही निर्माताओं के पास भी कोई अधिक स्टॉक नहीं होने के समाचार हैं, क्योंकि वे भी सीमित उत्पादन कर रहे हैं और इसका कारण यार्न के ऊंचे भाव हैं। व्यापारियों के अनुसार काफी समय बाद सिंथेटिक सूटिंग में अच्छी मांग देखने को मिली है। समर और वैवाहिक सीजन होने के कारण कॉटन सूटिंग व लिनेन आदि की मांग भी अच्छी है, हालांकि क्वालिटी अनुसार भाव में 200 रुपए प्रति मीटर तक की तेजी आ चुकी है। शर्टिंग की मांग भी है और आगामी ईद के कारण कुर्ता-पायजामे के लिए अच्छी मांग बनी हुई है। कॉटन आइटमों में बुटिक वालों की अच्छी मांग है। बुटिक वाले बाजार में कुछ नया तलाश करते नजर आ रहे हैं। सिंथेटिक और वैवाहिक साडिय़ों की अच्छी मांग बाजार में आ रही है। और भाव वृद्धि के बावजूद मांग बनी हुई है। लहंगा-चुन्नी की मांग कमजोर बताई जा रही है, जबकि वेस्टर्न वीयर यानि गाऊन आदि की मांग जोरदार है। लेडिज सूटों और ड्रेस मटीरियल की मांग में लगातार सुधार हो रहा है। तथा आगामी दिनों कॉटन सूटिंग की मांग भी अच्छी आने का अनुमान है।
 


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