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टेक्सटाइल चेन पर 12 प्रतिशत जीएसटी का चौतरफा विरोध

टेक्सटाइल चेन पर 12 प्रतिशत जीएसटी का चौतरफा विरोध

By: Textile World Date: 2021-12-08

नई दिल्ली/ राजेश शर्मा
आखिरकार सरकार ने एक जनवरी से टेक्सटाइल सेक्टर पर जीएसटी की समान दर यानि 12 प्रतिशत करने के लिए अधिसूचना जारी कर ही दी है। इसका देश भर के टेक्सटाइल उद्योग के संगठनों द्वारा विरोध किया जा रहा है, क्योंकि कि इसका लाभ केवल देश के 15 प्रतिशत उद्योगों को ही मिलेगा, जबकि नुकसान 85 प्रतिशत उद्योगों को तो होगा ही, उपभोक्ता को गारमेंट मंहगे मिलेंगे और वह भी परेशान होगा। यही पूरी टेक्सटाइल चैन पर 12 प्रतिशत जीएसटी होने से कर चोरी की संभावनाएं भी बढ़ जाएंगी क्योंकि यह एक कटु सत्य है कि टेक्स की अधिकता कर चोरी को बढ़ावा देती है। उल्लेखनीय है कि जीएसटी कौंसिल ने अपनी सितम्बर की बैठक में फैब्रिक और गारमेंट पर 12 प्रतिशत की समान दर से वस्तु एवं सेवा कर यानि जीएसटी लागू करने का निर्णय किया था। अभी तक कुछ प्रकार के फैब्रिक पर जीएसटी की दर 5 प्रतिशत है, जबकि एक हजार रुपए मूल्य से कम के रेडीमेड गारमेंट पर यह दर 5 प्रतिशत है और एक हजार रुपए मूल्य से अधिक के परिधानों पर 12 प्रतिशत है। सरकार का कहना है कि उसने इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर की समस्या को सुलझाने के लिए ऐसा किया है। सरकार का मानना है कि इससे टेक्सटाइल उद्योग को लाभ होगा और निर्यात बढऩे के साथ ही इस सेक्टर में निवेश भी बढ़ेगा। बहरहाल देश का टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योग इसका विरोध कर रहा है, क्योंकि जीएसटी की अधिक दर से लागत बढ़ेगी और कारोबार प्रभावित होगा। उद्योग जगत का मानना है कि इससे देश में महंगाई की दर भी बढ़ेगी और उपभोक्ता की परेशानी भी। उद्योग के अनुसार इससे माईक्रो, स्मॉल और मीडियम स्केल (एमएसएमई) की टेक्सटाइल और गारमेंट की युनिट प्रभावित होंगी। इंडियन चैम्बर ऑफ  कॉमर्स की टेक्सटाइल कमेटी के चेयरमेन श्री संजय के. जैन का कहना है कि जिस उद्योग में 80 प्रतिशत युनिट एमएसएमई सेक्टर में हैं, उस पर 12 प्रतिशत की दर से टैक्स लगाने से लागत बढ़ेगी और आम आदमी प्रभावित होगा। श्री जैन के अनुसार नई अधिसूचना के बाद मेन मेड फाईबर यानि एमएमएफ सेक्टर पर फैब्रिक से लेकर गारमेंट पर 12 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगेगा, जबकि कॉटन सेक्टर को कॉटन और यार्न पर 5 प्रतिशत तथा फैब्रिक और गारमेंट पर 12 प्रतिशत जीएसटी देना होगा। उद्योग जगत और बाजार 3 से 4 प्रतिशत तक की वृद्धि को तो पचा सकता है, लेकिन 7 प्रतिशत की वृद्धि काफी अधिक है। उनके अनुसार एमएसएमइ सेक्टर इससे सबसे अधिक प्रभावित होगा, क्योंकि वह कम लागत के कपड़े या गारमेंट बनाता है और लागत बढऩे से मांग प्रभावित हो सकती है। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि संभव है कि आगामी समय में मांग प्रभावित होने से गैर-संगठित क्षैत्र की अनेक युनिट जीएसटी से बाहर ही हो जाएं। उन्हें अफसोस है कि पूरी टेक्सटाइल सेक्टर पर जीएसटी की दर पूर्व स्तर बनाए रखने या पूरी सप्लाई चैन को 5 प्रतिशत की दर में लाने की उनके अनुरोध को सुना ही नहीं गया। उद्योग जगत का कहना है कि जब टेक्सटाइल और गारमेंट पहले ही कच्चे माल की ऊंची कीमतों से परेशान है और उसकी उत्पादन लागत बढ़ गई है, फिर टैक्स में वृद्धि उसकी परेशानी को और बढ़ा देगी। क्लोदिंग मेन्युफेक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ  इंडिया के प्रमुख श्री राहुल मेहता का कहना है कि गत दो महिनों के दौरान उद्योग जगत ने सरकार से अनेक बार मिल कर दरों को वर्तमान स्तर ही बनाए रखने का अनुरोध किया, लेकिन इसका कुछ असर नहीं हुआ। टेक्सटाइल व गारमेंट उद्योग के अनेक संगठनों का कहना है कि जीएसटी की नई दर से इस सेक्टर के लगभग 85 प्रतिशत उद्योग प्रभावित होंगे और कुल उत्पादों में से लगभग 80 प्रतिशत की लागत को बढ़ा देगा। उनका यह भी कहना है कि इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर की समस्या टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर के केवल 15 प्रतिशत उद्योगों की ही है, लेकिन सरकार उद्योग के एक बड़े हिस्से की मांग को अनसुना कर दिया है। 
अनुरोध...इसी बीच, रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ  इंडिया ने सरकार से अनुरोध किया है कि वह इस निर्णय पर फिर से विचार करे, क्योंकि इससे इस सेक्टर के लगभग 85 प्रतिशत युनिटें प्रभावित होंगी। इसके अतिरिक्त रेडीमेड गारमेंट का रिटेल कारोबार पहले ही संकट के दौर से गुजर रहा है और अब सरकार के इस निर्णय से उसकी परेशानी और बढ़ जाएगी। एसोसिएशन के सीईओ श्री कुमार राजगोपालन के अनुसार जीएसटी में 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी देश के 85 प्रतिशत उद्योग को बुरी तरह से प्रभावित करेगी, जबकि समस्या का समाधान केवल उन युनिटों का होगा, जो केवल 15 प्रतिशत ही हैं। इस प्रकार जीएसटी की दरों में बढ़ोतरी किसी के हित में भी नहीं है। टेक्स की अधिक दरों से कारोबार पर वित्तीय बोझ बढ़ जाएगा और विकास की गति प्रभावित होने के साथ ही एमएसएमई की कार्यशील पूंजी यानि वर्किंग केपिटल भी अधिक हो जाएगी। इस सेक्टर की लगभग 90 प्रतिशत यूनिट एमएसएमई में आती हैं। जहां तक उपभोक्ता का प्रश्न है, उसकी मांग भी प्रभावित होगी क्योंकि ऊंचे भाव पर खपत कम हो जाती है। 
कैट द्वारा विरोध...कॉन्फैडरेशन ऑफ ऑल इंडिया टे्रडर्ज यानि कैट भर टेक्सटाइल सेक्टर 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने के विरोध में उतर आई है और देश व्यापी आंदोलन छेडऩे का निर्णय किया है। कैट के सैक्रेटरी जनरल श्री प्रवीण खंडेलवाल का कहना है कि देश के व्यापारी और इस कारोबार में लगे कर्मचारी भी विरोध आंदोलन में भाग लेंगे। देहली हिंदुस्तानी मर्केन्टाई एसोसिएशन भी जीएसटी में बढ़ोतरी का विरोध कर रही है। 
लुधियाना स्थित फैडेरेशन ऑफ  ऑल इंडिया टेक्सटाइल मेन्युफेक्चरिंग एंड टे्रडिंग एसोसिएशन्स ने टेक्सटाइल सेक्टर पर जीएसटी की दरों में वृद्धि की आलोचना करते हुए सरकार से इस वापिस लेने की मांग की है। फैडरेशन ने विगत दिनों एक ज्ञापन भी केन्द्र सरकार को दिया है। फेडरेशन के चेयरमेन श्री अजित लाकड़ा का कहना है कि इससे उन्हें अधिक वर्किंग केपिटल की जरुरत होगी और इससे टेक्स की चोरी भी बढ़ सकती है।
स्वागत...ऐसा नहीं कि पूरा टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर या इनके सभी संगठन सरकार द्वारा जीएसटी की नई दरों की अधिसूचना का विरोध कर रहा हो, कुछ संगठन इसका स्वागत भी कर रहे हैं। सदर्न इंडिया मिल्स एसोसिएशन और कॉन्फेडरेशन इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री ने इसका स्वागत किया है। सिमा के चेयरमेन श्री रवि सेम और सिटी के  चेयरमैन श्री टी राजकुमार ने सरकार द्वारा एमएमएफ  सेक्टर के लिए इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को ठीक करने का स्वागत किया है। बहरहाल, इन दोनों का ही मानना है कि सरकार को कॉटन सेक्टर के लिए दरों में परिवर्तन नहीं करना चाहिए था। कंसोरिटम ऑफ  इंडियन असोशिएशन्स के कंवीनर श्री के.ई. रघुनाथन ने कहा कि जहां सरकार ने टेक्सटाइल उद्योग के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड स्कीम लागू की है, वहीं जीएसटी की दरों में 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी भी कर दी है, जिससे उद्योग और उपभोक्ता दोनों ही प्रभावित होंगे। कपड़ा उद्योग के सूत्रों के अनुसार देश में कुल फेब्रिक उत्पादन में से लगभग 90 प्रतिशत का उत्पादन असंगठित क्षेत्र में होता है।  सरकार द्वारा जीएसटी की दरों में बढ़ोतरी से सबसे अधिक पॉवरलूम और हेंडलूम सेक्टर प्रभावित होगा, क्योंकि इसकी उत्पादन लागत बढ़ जाएगी। यदि सरकार इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर की समस्या को सुलझाना चाहती है तो वह जीएसटी की दरों को 12 प्रतिशत से घटा कर 5 प्रतिशत कर दे।
कर चोरी की आशंका...व्यापारियों और उद्योगपतियों को आशंका है कि टेक्सटाइल चैन पर जीएसटी की दर 5 प्रतिशत से बढ़कर 12 प्रतिशत होने के बाद इस सेक्टर में कर चोरी बढऩे की आशंका है। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि जब कि टेक्स दर अधिक होती है तो कर चोरी बढ़ती है। और इस मामले में भी ऐसा होने की आशंका है। वास्तविकता यह है कि कम दर होने पर कोई भी चोरी करके परेशानी मोल नहीं लेना चाहता है।

लुधियाना स्थित फैडेरेशन ऑफ  ऑल इंडिया टेक्सटाइल मेन्युफेक्चरिंग एंड टे्रडिंग एसोसिएशन्स ने टेक्सटाइल सेक्टर पर जीएसटी की दरों में वृद्धि की आलोचना करते हुए सरकार से इस वापिस लेने की मांग की है। फैडरेशन ने विगत दिनों एक ज्ञापन भी केन्द्र सरकार को दिया है। फेडरेशन के चेयरमेन श्री अजित लाकड़ा का कहना है कि इससे उन्हें अधिक वर्किंग केपिटल की जरुरत होगी और इससे टेक्स की चोरी भी बढ़ सकती है।
स्वागत...ऐसा नहीं कि पूरा टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर या इनके सभी संगठन सरकार द्वारा जीएसटी की नई दरों की अधिसूचना का विरोध कर रहा हो, कुछ संगठन इसका स्वागत भी कर रहे हैं। सदर्न इंडिया मिल्स एसोसिएशन और कॉन्फेडरेशन इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री ने इसका स्वागत किया है। सिमा के चेयरमेन श्री रवि सेम और सिटी के  चेयरमैन श्री टी राजकुमार ने सरकार द्वारा एमएमएफ  सेक्टर के लिए इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को ठीक करने का स्वागत किया है। बहरहाल, इन दोनों का ही मानना है कि सरकार को कॉटन सेक्टर के लिए दरों में परिवर्तन नहीं करना चाहिए था। कंसोरिटम ऑफ  इंडियन असोशिएशन्स के कंवीनर श्री के.ई. रघुनाथन ने कहा कि जहां सरकार ने टेक्सटाइल उद्योग के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड स्कीम लागू की है, वहीं जीएसटी की दरों में 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी भी कर दी है, जिससे उद्योग और उपभोक्ता दोनों ही प्रभावित होंगे। कपड़ा उद्योग के सूत्रों के अनुसार देश में कुल फेब्रिक उत्पादन में से लगभग 90 प्रतिशत का उत्पादन असंगठित क्षेत्र में होता है।  

सरकार द्वारा जीएसटी की दरों में बढ़ोतरी से सबसे अधिक पॉवरलूम और हेंडलूम सेक्टर प्रभावित होगा, क्योंकि इसकी उत्पादन लागत बढ़ जाएगी। यदि सरकार इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर की समस्या को सुलझाना चाहती है तो वह जीएसटी की दरों को 12 प्रतिशत से घटा कर 5 प्रतिशत कर दे।
कर चोरी की आशंका...व्यापारियों और उद्योगपतियों को आशंका है कि टेक्सटाइल चैन पर जीएसटी की दर 5 प्रतिशत से बढ़कर 12 प्रतिशत होने के बाद इस सेक्टर में कर चोरी बढऩे की आशंका है। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि जब कि टेक्स दर अधिक होती है तो कर चोरी बढ़ती है। और इस मामले में भी ऐसा होने की आशंका है। वास्तविकता यह है कि कम दर होने पर कोई भी चोरी करके परेशानी मोल नहीं लेना चाहता है।
 

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