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कोरोना महामारी एक वर्ष पूर्ण होने के बाद स्थानीय वस्त्र मण्डी में आए कई बदलाव

कोरोना महामारी एक वर्ष पूर्ण होने के बाद स्थानीय वस्त्र मण्डी में आए कई बदलाव

By: Textile World Date: 2021-03-22


धागे में अप्रत्याशित तेजी से फैब्रिक की लागत भी बढ़ी

भीलवाड़ा/ कमलेश व्यास 
कोविड-19 महामारी को शुरू हुए 1 वर्ष बीत गया है। इस दौरान पूरी दुनिया ने ऐसा दौर देखा, जो जीवन में कभी नहीं देखा। उसी क्रम में भारत में भी संपूर्ण लॉकडाउन लगाया गया था और 30 मई 2020 तक पूरी तरह शत प्रतिशत कफ्र्यू ही रहा। 
30 मई के बाद अनलॉक-1 की शुरुआत हुई, जिसमें सरकार की गाइडलाइन के अनुसार व्यापार ट्रांसपोर्ट इत्यादि खुलने लगे। उस दौरान स्थानीय मण्डी में भी कुछ कपड़ा इकाईयों को खोलने की अनुमति दी गई और शनै: शनै: जुलाई तक सभी इकाइयाँ शिफ्ट अनुसार चलने लगी परंतु बाजार पूरी तरह प्रभावित हो चुका था। समारोह एवं आयोजन में पूरी आजादी नहीं थी, अत: संक्षिप्त कार्यक्रम ही हुए तो रिटेल में ग्राहकी खुल नहीं सकी।
इस बारे में मोनालिसा सिंथेटिक्स के डायरेक्टर श्री मुकेश कोठारी का मानना है कि आज तक की बाजार की स्थिति के हालात ये हैं कि पिछले 2 महीने में यार्न की दरों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई और पहली बार वीविंग और प्रोसेसिंग दरों में भी एक साथ तेजी आ चुकी, यानि अब फैब्रिक का मूल्य भी ऊंचे दामों में ही रहेगा।
बाजार सूत्रों के अनुसार कोरोना काल के 1 वर्ष के बाद होलसेलर एवं उत्पादक दोनों एक ही दिशा में चल रहे हैं। उत्पादक चाहता है कि कपड़ा जो स्टॉक में है, वो पहले बिके परंतु होलसेलर जो कपड़ा वर्तमान में डिमांड में है, वही लेना चाहता है और उसके लिए वो उत्पादक से अधिकतम पर भी खरीदी को तैयार है। इसकी वजह यह है कि जो वीवर स्पिनिंग मिलों को उसके अनुसार ही शेड लिखा रहे हैं जिसमें स्पिनिंग मिल्स शोल्ड प्रोग्राम पे जा रही है, जिसकी वजह से भाव बढ़ रहे हैं। दूसरा कच्चा माल क्रूड इत्यादि में तेजी चलने से भी यार्न दरें बढ़ी हैं। कई उत्पादक यह भी कह रहे हैं कि स्पिनिंग मिलों द्वारा लॉकडाउन की भरपाई की जा रही है और केन्द्र सरकार द्वारा एण्टी डम्पिंग ड्यूटी की अवधि बढ़ाने को भी बड़ा कारण मान रहे है। 
अब स्थानीय वस्त्र मंडी की बात करें तो कपड़ा व्यापार में बदलाव आएंगे जिसमें कई व्यापारी फाइनेंशियल क्राइसिस में आ रहे हैं। उनको माल मिलने में तकलीफ आने लगी है। ऐसा अनुमान है कि जो कपड़ा 1980 में जिस इज्जत से बिकता था, वह समय पुन: आने की ओर अग्रसर है। कपड़े की रेटें भी बढ़ेगी और मालकी शॉर्टेज होगी। अभी तक तो कपड़े की वास्तविक लागत से भीलवाड़ा में मिल रहा है, परंतु अब वो दौर समाप्ति की ओर है। फैब्रिक की लागत बढ़ेगी।
फिलहाल स्थानीय उत्पादक पुराने स्टॉक को खाली करने में लगे हैं और उनमें कई शीर्ष घरों को काफी सफलता भी मिली है। अभी जो कपड़ा बिक रहा है वो ठोस श्रेणी में है जैसे 2/18, प्रिण्टेड फाइबर डाइड ट्विल और DMS की फैंसी भारी डिजाइन्स में बिक्री हो रही है।
मण्डी को बड़ा झटका स्कूल यूनिफॉर्म में लगा है, क्योंकि पिछले साल से ही यूनिफॉर्म बिक्री ठहरी हुई है और अब आगे उद्यमी अगले सत्र से आशाएँ लगा रहे हैं। सब कुछ सामान्य रहा तो स्कूल यूनिफॉर्म का बड़ी तादाद में कपड़ा बनेगा, जिसमें बाजार और आगे जायेगा। फिलहाल यार्न दरें 15 मई तक नीचे नहीं आने की संभावना है। वीविंग भी सिंगल में 15-20 और डबल में 14-15 विर्थ तक चल रही है।
डी.के एजेन्सी के ऑनर श्री डी.के चौधरी ने बताया कि वर्तमान में बाजार में तेजी का दौर चल रहा है, यार्न दरे काफी बढ़ चुकी हैं, अब आगे व्यापार कोरोना के ऊपर निर्भर करेगा क्योंकि अभी पुन: केस बढऩे लगे हंै, इससे सभी में भय का वातावरण बना हुआ है। भीलवाड़ा वस्त्र मण्डी यूनिफॉर्म सेक्टर में काफी उत्पादन करती है जो बड़ी भागीदारी है, अत: इसमें मूवमेण्ट आना बहुत जरूरी है, हालांकि फैंसी एवं गारमेण्ट की ग्राहकी तो अभी तक बेहतर रही है।

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