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कपड़ा उद्यमी का खाता हैक कर निकाल लिए 77 लाख रूपये

कपड़ा उद्यमी का खाता हैक कर निकाल लिए 77 लाख रूपये

By: Textile World Date: 2021-03-01


भीलवाड़ा/ कमलेश व्यास
स्थानीय वस्त्र मण्डी की सूटिंग कम्पनी प्रकाश सिन्थेटिक (लालानी सूटिंग) के ऑनर श्री हरकचन्द लालानी के बैंक खाते से साइबर गैंग द्वारा 77 लाख रूपये निकाल लिये।
जानकारी अनुसार शहर के प्रतापनगर थाना क्षेत्र अधिकारियों के अनुसार कम्पनी के ऑनर द्वारा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने के पश्चात् पुलिस और बैंक की प्रारम्भिक जाँच में सामने आया कि साइबर ठगों ने फैक्ट्री मालिक के सीसी बैंक अकाउण्ट से 82 लाख रूपये निकाले। इसके बाद 77 लाख रूपये तीन अलग-अलग अकाउण्ट में ट्रासंफर कर दिये और एटीएम कार्ड के जरिये रूपये निकालने पर 5 लाख रूपये नहीं निकाल पाए, जो वापस अकाउण्ट में ट्रांसफर हो गये। इस बीच उद्यमी द्वारा पता चलते ही बैंक को सूचना देकर खाते फ्रीज करवाए। ये सभी खाते नोएडा के बताए जा रहे हैं, जो एचडीएफसी बैंक से जुड़े हैं। इसलिए पुलिस को शक है कि इस मामले में कोई बाहर ही साइबर अपराध करने वाली गैंग जुड़ी हुई है। बैंकिंग एक्सपर्ट और पुलिस का शुरुआती तौर पर मानना है कि ये खाते फ्रॉड हो सकते हैं या किसी को डमी बनाकर बनाए जा सकते हैं, क्योंकि इस तरह के अपराध करने वाले सही खाते नहीं खुलवा सकते है। अब पुलिस इन खातों की जानकारी जुटा रही है। एक्सपर्ट का कहना है कि यह अकाउंट हेक करने का मामला इसलिए भी लग रहा है कि व्यापारी के अनुसार उन्होंने ओटीपी किसी को नहीं दिया। ऐसे में बिना ओटीपी मांगे ठगी करने का इशारा अकाउंट हैक करने की तरफ ही जाता है।

खाता हैक कर नेट बैंकिंग से ठगी या डाटा लीक भी -साइबर सलाहकार, दिल्ली
सीसी अकाउंट में यूपीआई आईडी नहीं बनती है। इसमें लेन-देन नेट बैंकिंग के जरिए होता है। ऐसे में संभावना है कि साइबर ठगों ने अकाउंट हैक कर राशि ट्रांसफर कर ली। दूसरी संभावना ये भी है कि ठगी के शिकार हुए व्यक्ति के अकाउंट से जुड़ा डाटा किसी नजदीकी व्यक्ति के सामने लीक हो गया हो। अब पुलिस बैंक से मदद लेकर जिन अकाउंट में रुपए ट्रांसफर हुए, उनकी जानकारी जुटाते हुए उन अकाउंट को फ्रीज करवाकर ठगों तक पहुंचने की कवायद करेगी। इसके साथ ही इंटरनेट सर्विस देने वाली और टेलीकॉम कंपनियों की मदद से साइबर अपराधी तक पहुंचने का प्रयास करेगी। इन हालात में हमारा सुझाव है कि कभी भी ईमेल या मैसेज से मिले लिंक पर जाकर इंटरनेट बैंकिंग अकाउंट लॉगिन ना करें। अपने इंटरनेट बैंकिंग अकाउंट की लॉगिन डिटेल्स किसी के साथ साझा नहीं करें। इंटरनेट बैंकिंग अकाउंट में लगे फोन नंबर वाले सिमकार्ड को हमेशा अपने पास एवं चालू रखें। इंटरनेट बैंकिंग अकाउंट में लगे ई-मेल अकाउंट को भी सुरक्षित रखें। लॉगिन के समय ब्राउजर में बैंक का यूआरएल खुद टाइप करें। ब्राउजर से मिलने वाले सुझावों पर क्लिक न करें। नेट बैंकिंग वाले सिस्टम में एंटी वाइरस रखें। इंटरनेट बैंकिंग अकाउंट के लॉगिन एवं ट्रांजेक्शन पासवर्ड जटिल रखें एवं हर 15-20 दिन में बदलते रहें। कभी भी ईमेल या सोशल मीडिया मैसेंजर से नेट बैंकिंग पासवर्ड शेयर ना करें। अपने अकाउंट की ट्रांजेक्शन हिस्ट्री और बेनिफिशरी डिटेल्स लगातार चेक करते रहें।
मैं सो रहा था, न तो कॉल आया न ही ओटीपी बताया: व्यापारी
व्यापारी हरकचंद लालानी ने बताया कि वे मंगलवार रात को सो रहे थे। रात करीब एक से 1.30 बजे उनके मोबाइल फोन पर अज्ञात नंबर से ओटीपी आया। हालांकि रात को न तो किसी का कॉल आया और न ही किसी को ओटीपी बताया, इसके बावजूद रुपए दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर हो गए। इधर, थाना प्रभारी भजनलाल ने मामले की जानकारी एसपी विकास शर्मा को दी तो उन्होंने तत्काल साइबर एक्सपर्ट की टीम गठित कर खुलासे के निर्देश दिए हैं। साइबर टीम प्रारंभिक तौर पर मिले तथ्यों के आधार पर साइबर अपराधियों की जानकारी जुटाने में लग गई है और अभी तक सुराग नहीं लगा है।
 

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