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सीसीआई की 10 लाख गांठ कॉटन निर्यात की योजना -श्रीमती ईरानी

सीसीआई की 10 लाख गांठ कॉटन निर्यात की योजना -श्रीमती ईरानी

By: Textile World Date: 2021-02-24

सीसीआई रोजाना नीलामी द्वारा निर्यात के लिए कॉटन की बिक्री कर रही है

नई दिल्ली/ राजेश शर्मा
वस्त्र मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी ने इस बात से इन्कार किया है कि कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ  इंडिया (सीसीआई) की 10 लाख गांठ (प्रति गांठ 170 किलो) निर्यात करने की कोई योजना नहीं है। सीसीआई रोजाना नीलामी द्वारा निर्यात के लिए कॉटन की बिक्री कर रही है। सीसीआई ने एक अक्टूबर से आरंभ हुए कॉटन वर्ष 2020-21 में 6 फरवरी तक कुल 90.87 लाख टन कॉटन की खरीद की थी, जो कुल अनुमानित उत्पादन का 24.49 प्रतिशत है।
श्रीमती ईरानी के अनुसार अब अधिकांश मंडियों  में कॉटन के भाव सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य यानि एमएसपी से ऊपर चले गए हैं इसलिए अब सीसीआई ने खरीद कम कर दी है, ताकि मिलों को कॉटन उचित मूल्य पर मिलती रहे। सीसीआई ने 6 फरवरी तक कुल 90.87 लाख गांठ कॉटन की खरीद की है। 
उन्होंने बताया कि विगत दिनों सीओसीपीसी की बैठक में देश में 2020-21 के दौरान कॉटन उत्पादन का अनुमान 371 लाख गांठ का लगाया गया है। इस प्रकार सरकार ने कुल उत्पादन की 24.49 प्रतिशत कॉटन की खरीद की है। सरकार ने तेलगंाना में सबसे अधिक 33.33 लाख गांठ कॉटन की खरीद की है, जबकि वहां पर उत्पादन 60 लाख गांठ होने का अनुमान है। महाराष्ट्र में कॉटन की खरीद 17.45 लाख गांठ की की है, जबकि उत्पादन का अनुमान 86 लाख गांठ का है। हरियाणा में 25 लाख गांठ के उत्पादन में से सरकारी खरीद 10.52 लाख गांठ की हुई है, जबकि पंजाब में 12 लाख गांठ के उत्पादन में से 5.38  लाख गांठ की खरीद की है। राजस्थान में 27 लाख गांठ के उत्पादन में से 9.11 लाख गांठ की खरीद की है, जबकि मध्य प्रदेश में 21 लाख गांठ के उत्पादन में से 4.39 लाख गांठ की खरीद की है।
हालांकि गुजरात देश में कॉटन का सबसे बड़ा उत्पादक देश है और वहां पर उत्पादन का अनुमान 90.50 लाख गांठ का है, लेकिन सरकारी खरीद केवल 4.05 लाख गांठ की हुई है। तमिलनाडु में उत्पादन का अनुमान 5 लाख गांठ का है, लेकिन वहां पर सरकारी खरीद नहीं हुई है। कर्नाटक में 20 लाख गांठ की आवक में से केवल 1.26 लाख गांठ ही सरकार ने खरीदी है, जबकि उड़ीसा में 4.50 लाख गांठ के उत्पादन में से केवल 1.98 लाख गांठ खरीदी है। कपड़ा मंत्री के अनुसार भारत में कॉटन उत्पादन सरप्लस है तथा इसका निर्यात देश में कॉटन की कुल उपलब्धता को प्रभावित नहीं करेगा। इससे किसानों को लाभ ही होगा, क्योंकि उन्हें कॉटन के भाव अधिक मिल सकेंगे।

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