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टेक्सटाइल उद्योग द्वारा बजट का स्वागत

टेक्सटाइल उद्योग द्वारा बजट का स्वागत

By: Textile World Date: 2021-02-08

नायलॉन चिप्स, नायलॉन फाइबर पर आयात शुल्क घटाने से खुशी

कॉटन पर ड्यूटी से नाराजगी

नई दिल्ली/ राजेश शर्मा

विगत दिनों वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा 2021-22 के बजट प्रस्तावों का देश के टेक्सटाइल और क्लोदिंग उद्योग द्वारा स्वागत किया जा रहा है तथा केप्रोलेक्टम, नायलॉन चिप्स, नायलॉन फाइबर और यार्न पर 5 प्रतिशत का आयात शुल्क लगाने को सही दिशा में उठाया गया कदम बताया जा रहा है, लेकिन कॉटन के आयात पर 10 प्रतिशत के आयात शुल्क पर नाराजगी जाहिर की जा रही है।

आगामी 3 वर्षों के दौरान मेगा इन्वेस्टमेंट टेक्सटाइल पाक्र्स के तहत 7 टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने के प्रस्ताव का टेक्सटाइल व क्लोदिंग उद्योग के सभी संगठनों द्वारा स्वागत किया जा रहा है। कॉन्फेडेरशन ऑफ  इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री यानि सिटी के चेयरमैन ने बजट में स्वास्थ्य के लिए किए गए अधिक आवंटन और सरकारी खर्च में वृद्धि का स्वागत करते हुए कहा कि इससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

उन्होंने सरकार द्वारा 3 वर्षों के दौरान मेगा इन्वेस्टमेंट टेक्सटाइल पाक्र्स स्कीम के तहत देश में 7 पार्क स्थापित करने का भी स्वागत किया। इससे 1,000 एकड़ भूमि में फैले इन टेक्सटाइल पार्कों में वल्र्ड क्लास आधारभूत ढांचा होने के साथ ही अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी, जो भारत को विश्व में टेक्सटाइल निर्यात में चैम्पियन बनने में सहायक होगी। मैनमेड फाइबर और टेक्निकल टेक्सटाइल के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेन्टिव स्कीम के तहत 10,683 करोड़ रुपए का प्रावधान करने का स्वागत करते हुए कहा कि इससे भारतीय उत्पाद विश्व बाजार में प्रतिस्पर्धक होने के साथ ही विशाल निवेश आकर्षित होगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।उन्होंने कहा कि यह एक अच्छी बात है कि सरकार ने इस तथ्य को पहचाना है कि  भारतीय टेक्सटाइल उद्योग का देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है और रोजगार के व्यापक अवसर पैदा करता है।

सरकार द्वारा केप्रोलेक्टम, नायलॉन चिप्स और नायलॉन फाइबर, यार्न पर आयात शुल्क घटा कर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे नायलोन श्रंखला पोलिएस्टर और मैनमेड फाइबर के बराबर हो गई है।

निराशा...सिटी के चेयरमैन ने सरकार द्वारा कॉटन के आयात पर 10 प्रतिशत शुल्क को बीमार टेक्सटाइल उद्योग के लिए  प्रहार बताते हुए कहा है कि इससे उत्पादकों को कोई लाभ नहीं होगा। बजट में सरकार ने कॉटन के आयात पर 5 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5 प्रतिशत एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर सेस लगाया है, जबकि कॉटन वेस्ट पर 10 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी लगाई है। सिटी चेयरमैन श्री राजकुमार का कहना है कि देश में कॉटन का आयात लगभग 12-14 लाख गांठ प्रति वर्ष होता है जो कुल उत्पादन का मामूली भाग है। यही नहीं जिस कॉटन का आयात किया जाता है, उसका उत्पादन देश में नहीं होता है। उनका कहना है कि इस आयातित कॉटन का प्रयोग विदेशों का निर्यात किए जाने वाले फैब्रिक या गारमेंट के लिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त उनकी कुछ मांगो जैसे वीएसएफ के आयात पर एंटी डम्पिंग को समाप्त करना, एमएमएफ के लिए जीएसटी की दरों को तर्कसंगत बनाना आदि पर बजट में विचार नहीं किया गया है।

अधिक आवंटन का स्वागत

आगामी वर्ष के आम बजट में वित्त मंत्री सीतारमण द्वारा टेक्सटाइल एवं क्लोदिंग सेक्टर के लिए अधिक राशि के आबंटन का नॉर्थ इंडिया टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (निटमा) ने स्वागत किया है। निटमा के प्रेसीडेंट श्री संजय गर्ग का कहना है कि सरकार ने आधारभूत ढांचे के विकास आदि पर जोर देते हुए अधिक राशि का आबंटन किया है जो स्वागत योग्य है। सरकार ने आगामी वित्त वर्ष के बजट के लिए कुल 3,631.63 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है जबकि चालू वर्ष के लिए यह राशि 3,000 करोड़ रुपए है।

श्री गर्ग का कहना है कि सरकार बजट में अधिक राशि के आबंटन के साथ आगामी 3 वर्षों में 7 मेगा टेक्सटाइल पार्कों के निर्माण के अतिरिक्त केप्रोलेक्टम, नायनॉल चिप्स आदि के आयात शुल्क में कमी आदि से घरेलू उद्योग लाभान्वित होगा।

उनका कहना है कि सरकार के सक्रिय सपोर्ट और  सहयोग से आने वाले वर्षो में टेक्सटाइल उद्योग विश्व में प्रतिस्पर्धक बनने के साथ ही विशाल निवेश को आकर्षित करने के साथ ही रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराएगा। उनका कहना है कि कॉटन आयात पर ड्यूटी लगाने और रॉ सिल्क तथा सिल्क यार्न पर आयात शुल्क 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने से इनके घरेलू उपभोक्ता ओं को लाभ होगा। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि मैनमेड यार्न पर आयात शुल्क की दर वर्तमान 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत करने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि सस्ते आयात से मैनमेड यार्न के घरेलू उत्पादक परेशानी अनुभव कर रहे हैं। कॉटन टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन कौंसिल के चेयरमैन श्री मनोज पाटोदिया का कहना है कि सरकार द्वारा कैप्रोलेक्टम, नायलॉन चिप्स, नायलान यार्न आदि पर आयात शुल्क में कमी से घरेलू एमएमएफ  सेक्टर और खासकर एमएसएमइ सेक्टर को लाभ होगा। बहरहाल, उन्होंने कॉटन आयात पर शुल्क लगाने की आलोचना करते हुए कहा कि इससे भारतीय उत्पादों की लागत में वृद्धि होगी और निर्यात प्रभावित हो सकता है। क्रिसिल रिसर्च की निदेशक (टेक्सटाइल्स) सुश्री हेतल गांधी का कहना है कि मेगा टेक्सटाइल पाक्र्स की स्थापना से भारतीय टेक्सटाइल निर्यातक वियतनाम, बांग्लादेश आदि के निर्यातकों से मुकाबला कर सकेंगे। पार्कों की स्थापना से भारतीय निर्माताओं की लागत कम होने के साथ ही क्वालिटी में भी सुधार होगा।

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