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यार्न दरों में तेजी बरकरार इधर केमिकल एवं कोयला महंगा होने से प्रोसेस  गृहों की दरों में भी वृद्धि की संभावना

यार्न दरों में तेजी बरकरार इधर केमिकल एवं कोयला महंगा होने से प्रोसेस गृहों की दरों में भी वृद्धि की संभावना

By: Textile World Date: 2020-12-25

भीलवाड़ा/ कमलेश व्यास

मलमास के आरम्भ होते ही प्रतिवर्ष की भांति बाजार में शिथिलता है। केवल रूटीन लिवाली ही हो रही है। बाजार सूत्रों के अनुसार दिवाली के लगभग घरेलू बाजार में निकली मांग से सावे खत्म होने तक ठीक-ठाक कार्य हुआ एवं यार्न मिलों द्वारा लॉकडाउन के दौरान खाली जगह की पूर्ति के लिए दरों में काफी वृद्धि की गई। विशेषज्ञों का भी कहना है कि जब तक चाइना एवं भारत के बीच समझौता नहीं होता तब तक यह दरें बढ़ी हुई रहेगी।

वर्तमान में स्थानीय मंडी के सूटिंग उत्पादों में पक्का कपड़ा यानि जो कपड़ा अपने नाम प्रकृति से जाना जाता है जैसे काउण्ट में 2/18, 2/15, NTRT, 2/30, ट्विल, फाइबर डाइड, प्रिंटेड, मिलाज प्रिण्टेड एवं जान स्लब इत्यादि बिक रहा है। डीएमएस की ट्विल डिजाइन्स 285 ग्राम से 330 ग्राम तक में माल की लिवाली ठीक है। इधर शादी महोत्सवों में लिमिटेड संख्या करने से हल्के मालों में लिवाली नहीं के बराबर है। इस समय मण्डी में यूनिफॉर्म का कार्य गतिशील रहता है, जो ठप्प पड़ा हुआ है क्योंकि अब आगामी सेशन के लिये उद्यमी इंतजार कर रहे हैं। इसके चलते स्थानीय वीविंग उद्योग कठिनाई के दौर से गुजर रहा है। जॉब दरें निचले स्तर पर ही रही है।

इधर यार्न दरों में वृद्धि होने एवं प्रोसेस गृहों में डाईकेमिकल एवं कोयला महंगा होने से प्रोसेसिंग लागत भी बढ़ सकती है। अत: फैब्रिक भी 8 से 9 रूपये प्रति मीटर बढ़ती दिख रही है। आगामी सेशन में स्कूल खुलने का निर्णय अगर होता है एवं अप्रैल में सावे की शुरूआत एवं एक्सपोर्ट में निकलने वाली मांग से 'पुन: वीविंग इण्डस्ट्री के रफ्तार पकडऩे की संभावना है।

ए.के. स्पिनटेक्स 

ए. के. स्पिनटेक्स टेक्निकल प्रेसिडेण्ट श्री अरूण सिंह ने बताया कि कॉटन में थोड़ा बहुत कार्य हो रहा है। परंतु कॉटन में भी रेट बढ़ाने से असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सभी उद्यमी आशंकित हैं। सावे भी काफी लेट हैं। इधर धागा महंगा हो गया है जिससे पुराना स्टॉक तो खाली हुआ है परंतु नये ऑर्डर नहीं आ रहे हंै। पिछले मार्च से अब तक यूनिफॉर्म तो बिल्कुल ठप्प पड़ा है वरना इस समय इस सेक्टर में काम पीक पर होता है। इधर प्रोसेस इंडस्ट्री में कोयला 1600 रुपए प्रति टन बढ़ गया। केमिकल एवं अन्य रॉ मटीरियल में दरें बढऩे से प्रोसेस इंडस्ट्री दबाव में है।

बांसवाड़ा सिंटेक्स 

बांसवाड़ा सिंटेक्स यार्न मिल के स्थानीय सप्लायर श्री बीजी झँवर ने बताया कि यार्न दरों में काफी वृद्धि होने से फैब्रिक की रेट 7 से 8 रुपए प्रति मीटर बढ़ेगी एवं अब आगामी समय में भीलवाड़ा बाजार का कपड़ा वापस डीलर, डिस्ट्रीब्यूटर पर ही केंद्रित होगा यानी थोक में चिल्लर बिक्री कम हो जाएगी। इधर यार्न एवं प्रोसेस दरें बढ़ी हुई दरों पर रहेगी तो 15 जनवरी के आस पास 3-4 रुपए फैब्रिक में और बढ़ेंगे। अब मार्च के लगभग स्कूलों पर सरकार फैसला लेती है तो वीविंग इंडस्ट्री में नि:संदेह उछाल आएगा।

 

कपड़ा उद्योग-चायना v/s भारत

कोरोना वायरस आने के बाद भारत से चीन को रुई और धागे का निर्यात ठप्प पड़ गया और कपड़ा उद्योग में इस्तेमाल होने वाला रासायनिक पदार्थ एसेसरीज आइटम का आयात नहीं हो पा रहा है जिससे घरेलू कपड़ा उद्योग पर व्यापक असर पड़ा है। कारोबारी बताते हैं कि चीन से केमिकल्स और एसेसरीज आइटम का आयात नहीं होने से घरेलू कपड़ा उद्योग की लागत बढ़ गई है। फलस्वरूप आने वाले दिनों में कपड़ा और महंगा हो सकता है। कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (सी आई टी आई) के पूर्व अध्यक्ष श्री संजय जैन ने बताया कि घरेलू कपड़ा उद्योग में प्रोसेसिंग खर्च में 10 फीसदी का इजाफा हो जाएगा जिससे फैब्रिक दरों में वृद्धि होगी।  हालांकि भारत चीन को तैयार कपड़ा निर्यात नहीं करता है लेकिन चीन भारतीय रुई व धागों का बड़ा खरीददार है परंतु कोरोना वायरस से इन उत्पादों का निर्यात ठप्प पड़ गया है। दूसरी ओर भारत सरकार द्वारा एण्टी डम्पिंग ड्यूटी की अवधि बढ़ाने से आयातित मालों के बजाय घरेलू स्पिनिंग मिलों ने दरें बढ़ाकर भरपूर लाभ उठाया, जिसका प्रभाव स्थानीय सूटिंग उद्योग पर भी पड़ा जबकि घरेलू बाजार में फैब्रिक की डिमाण्ड विशेष नहीं है।

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