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सरकार जल्दी ही करेगी नेशनल :  टेक्सटाइल पॉलिसी की घोषणा

सरकार जल्दी ही करेगी नेशनल : टेक्सटाइल पॉलिसी की घोषणा

By: Textile World Date: 2020-12-24

देश को निर्माता और निर्यात हब बनाने पर होगा फोकस

 

नई दिल्ली/ राजेश शर्मा

देश में सबसे अधिक रोजगार प्रदान करने वाले और कृषि पर आधारित टेक्सटाइल सेक्टर में निवेश तथा रोजगार बढ़ाने के साथ ही विश्व बाजार में भारतीय उत्पादों को प्रतिस्पर्धक बनाने के उद्देश्य से जल्दी ही सरकार बहुप्रतीक्षित नेशनल टेक्सटाइल पॉलिसी की घोषणा कर सकती है। टेक्सटाइल मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार इस नीति का केबिनेट नोट तैयार करके केबिनेट को उसकी मंजूरी के लिए भेजा जा चुका है और जल्दी ही मंजूरी मिलने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष दिसम्बर में सरकार ने टेक्सटाइल उद्योग और अन्य सम्बंधित क्षेत्रों से नई टेक्सटाइल नीति बनाने के लिए सुझाव आदि मांगे थे और उस पर बड़ी संख्या में सुझाव प्राप्त हुए हैं।

सूत्रों के अनुसार नेशनल टेक्सटाइल पॉलिसी में सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान को ध्यान में रखा गया है।इसमें भारत को वैश्विक स्तर पर निर्माता और निर्यात हब बनाने की दिशा में अनेक प्रावधान किए जाएंगे, ताकि इस सेक्टर में नया निवेश बढ़े।

सूत्रों का कहना है कि इस नीति का उद्देश्य आगामी 5 वर्षो के दौरान यानि 2021-26 तक भारत का टेक्सटाइल उद्योग  300 बिलियन डॉलर का बनाना और निर्यात बढ़कर 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचाना है। सरकार नई नीति में टेक्निकल टेक्सटाइल के निर्यात को बढ़ाकर 40 बिलियन डॉलर करने के लिए कुछ घोषणाएं भी कर सकती है।

जानकारों का कहना है कि सरकार के लिए टेक्सटाइल उद्योग में नए निवेश को बढ़ावा देने के लिए केपिटल सब्सिडी दे सकती है और इसके लिए एक विशेष फं ड बनाया जा सकता है। नई नीति में सरकार का फोकस टेक्सटाइल सेक्टर के बुनियादी ढांचे में सुधार पर भी हो सकता है और इसके लिए मेगा पार्क की स्थापना की जा सकती है, जिनके लिए 10,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि इस समय देश से टेक्सटाइल सेक्टर का निर्यात लगभग 35 बिलियन डॉलर का ही है और इसका प्रमुख कारण भारतीय उत्पादों का विश्व बाजार में प्रतिस्पर्धक नहीं होना है। नई नीति में सरकार भारतीय उत्पादों को प्रतिस्पर्धक बनाने के लिए अनेक प्रावधान कर सकती है।

 

आत्मनिर्भर भारत अभियान

उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार ने पहले मेक इन इंडिया मिशन लागू किया था और इस वर्ष के आरंभ में आत्म निर्भर भारत अभियान आरंभ किया। जिसका उद्देश्य देश को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके साथ ही आयात को कम करने और निर्यात को बढ़ावा देने के अतिरिक्त रोजगार के अवसर देने वाले उद्योगों के विकास को प्राथमिकता देना है। देश के टेक्सटाइल सेक्टर में ये सभी विशेषताएं हैं और यह देश में न केवल सबसे अधिक रोजगार प्रदान कर रहा है अपितु निर्यात में भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। वर्ष 2018 में देश के टेक्सटाइल सेक्टर का आकार 140 बिलियन डॉलर का था, जिसमें घरेलू बाजार 100 बिलियन डॉलर का था। सूत्रों का कहना है कि वैश्विक टेक्सटाइल बाजार में भारतीय निर्यात का योगदान भी इस समय लगभग 5 प्रतिशत ही है।

भारत विश्व का कॉटन का सबसे बड़ा उत्पादक देश है, जबकि पोलियस्टर, फाइबर उत्पादन में इसका स्थान दूसरा है। वर्तमान टेक्सटाइल नीति लगभग 13 वर्ष पूर्व बनाई गई थी। तब से अब तक परिस्थितियां काफी बदल गई हैं और अनेक नई तकनीक आ चुकी है। तकनीक अपग्रेडशन के लिए सरकार ने अमेंडिड  टेक्नोलॉजी अपग्रेडशन फंड आरंभ किया हुआ है। । मोदी सरकार ने 2016 में भी गारमेंट उद्योग को 6,000 करोड़ रुपए का पैकेज दिया था। टेक्सटाइल उद्योग के सूत्रों का कहना है कि देश से टेक्सटाइल सेक्टर (गारमेण्ट सहित) में निर्यात की व्यापक संभावनाएं हैं, लेकिन भारतीय उत्पादों का अन्य प्रतिस्पर्धक देशों की तुलना में मंहगा होना बाधक बन रहा है।

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