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सरकार ने बढ़ाई यार्न पर एण्टी डम्पिंग ड्यूटी की अवधि

सरकार ने बढ़ाई यार्न पर एण्टी डम्पिंग ड्यूटी की अवधि

By: Textile World Date: 2020-12-14

सूरत/ कोरोना से त्रस्त व्यापारियों को कोई राहत नहीं मिल रही है। वित्त मंत्रालय ने चीन और थाईलेंड से आयातित पॉलिएस्टर एफडीवाय यार्न पर एंटीडंपिंग ड्यूटी 31 दिसंबर तक बढ़ा दी है। इतना ही नहीं, डीजीटीआर ने भी इस पर अगले 5 वर्षों तक ड्यूटी लगाने की अनुशंसा की है। ऐसी सूरत में आशा की कोई किरण नजर नहीं आती।
वस्तुत: व्यापारियों को आयातित यार्न सस्ता पड़ता है। उन्हें लगता है कि देश में गिने-चुने यार्न निर्माता हैं, जो अपनी मनमर्जी से भाव बढ़ाते रहते हैं। इसी कारण आयातित यार्न अपेक्षाकृत सस्ता पड़ता है।
इस बारे में विभिन्न एसोसिएशन्स का कहना है कि सरकार को ड्यूटी बढ़ाने अथवा जारी रखने के लिए व्यापारियों से वार्ता करनी चाहिए। इस बारे में लूम्स निर्माताओं का भी मानना है कि यदि पॉलिस्टर यान पर एंटी डंपिंग ड्यूटी बढ़ाई जाती है, तो स्थानीय स्पिनर्स को बाजार में मनमर्जी से दाम बढ़ाने का एकाधिकार मिल जाएगा। ऐसे में सरकार को वीवर्स को सुनने के बाद ही समुचित निर्णय लेना चाहिए।
विदित रहे कि सरकार के इस निर्णय से सूरत का कपड़ा उद्योग सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है।
पूरे मामले की वस्तु स्थिति यह है कि केंद्र ने सन 2015 में थाईलैंड और चीन से आयातित एफडीवाई यार्न पर एंटी डंपिंग शुल्क लगाया था, जो 19 अक्टूबर 2020 को समाप्त हो रहा था। सरकार ने अब इस अवधि को 31 दिसंबर 2020 तक बढ़ा दिया। दूसरी और पिछले 2 माह वस्त्र निर्माताओं ने एंटी डंपिंग ड्यूटी हटाने की मुहिम चला रखी थी।
सूरत/ कोरोना से त्रस्त व्यापारियों को कोई राहत नहीं मिल रही है। वित्त मंत्रालय ने चीन और थाईलेंड से आयातित पॉलिएस्टर एफडीवाय यार्न पर एंटीडंपिंग ड्यूटी 31 दिसंबर तक बढ़ा दी है। इतना ही नहीं, डीजीटीआर ने भी इस पर अगले 5 वर्षों तक ड्यूटी लगाने की अनुशंसा की है। ऐसी सूरत में आशा की कोई किरण नजर नहीं आती।
वस्तुत: व्यापारियों को आयातित यार्न सस्ता पड़ता है। उन्हें लगता है कि देश में गिने-चुने यार्न निर्माता हैं, जो अपनी मनमर्जी से भाव बढ़ाते रहते हैं। इसी कारण आयातित यार्न अपेक्षाकृत सस्ता पड़ता है।
इस बारे में विभिन्न एसोसिएशन्स का कहना है कि सरकार को ड्यूटी बढ़ाने अथवा जारी रखने के लिए व्यापारियों से वार्ता करनी चाहिए। इस बारे में लूम्स निर्माताओं का भी मानना है कि यदि पॉलिस्टर यान पर एंटी डंपिंग ड्यूटी बढ़ाई जाती है, तो स्थानीय स्पिनर्स को बाजार में मनमर्जी से दाम बढ़ाने का एकाधिकार मिल जाएगा। ऐसे में सरकार को वीवर्स को सुनने के बाद ही समुचित निर्णय लेना चाहिए।
विदित रहे कि सरकार के इस निर्णय से सूरत का कपड़ा उद्योग सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है।
पूरे मामले की वस्तु स्थिति यह है कि केंद्र ने सन 2015 में थाईलैंड और चीन से आयातित एफडीवाई यार्न पर एंटी डंपिंग शुल्क लगाया था, जो 19 अक्टूबर 2020 को समाप्त हो रहा था। सरकार ने अब इस अवधि को 31 दिसंबर 2020 तक बढ़ा दिया। दूसरी और पिछले 2 माह वस्त्र निर्माताओं ने एंटी डंपिंग ड्यूटी हटाने की मुहिम चला रखी थी।

 

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