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उद्योग व्यवसाय बुलंदियों की ओर

उद्योग व्यवसाय बुलंदियों की ओर

By: Textile World Date: 2020-11-07

बालोतरा/ लालचन्द पूनित

ज्यों ज्यों दीपोत्सव की निकटता का समय उभरता है, एक नई रोशनी का सरगम प्रकट होता लग रहा है। क्षेत्र की प्रभावी पुण्यकारी जीवन्तता ने विकट दिनों में भी कुछ ऐसा कर दिखाया कि उद्यमियों ने अपने लक्ष्य मार्ग पर निरंतर बढऩे का क्रम नहीं छोड़ा। इसका परिणाम यह रहा कि मंजिल निकट आती प्रतीत होने लगी ।

अब तो परिस्थितियों में भारी परिवर्तन दृष्टिगोचर होने लगा है। निराशा और संत्रास की पीड़ा का एहसास औद्योगिक गतिविधियों में पुन: सक्रियता की ओर होने से नई आशाएं जगने लगी है। कई उद्योगों में चालानी का अभाव था, वे अभी युवा दौड़ में लग गए हैं। नाइटी, प्रिंट रेयान, नाइटी क्लॉथ क्षेत्र के उत्पादकों को सही माने में नवजीवन देने का काम किया। सदा सुहागन पोपलीन, पेटिकोट, केशमेन्ट आदि का रुतबा दिनों दिन निखरता जा रहा है।

त्यौहारी सीजन में और उसके बाद की सीजन के प्रति उद्योगों की उम्मीदें आशाओं से लबालब हैं। बीता समय चालानी की रफ्तार में तेजी का परिचायक भले न रहा हो, किन्तु आने वाला समय निश्चित रूप से कीर्तिमान स्थापित करने वाला होगा। अंधेरों की गर्दिश के स्थान पर प्रकाश पुंज में सभी कोई सफलता का शंखनाद करते प्रतीत होंगे। नए सवेरे की आहट का अंदाजा सहज में लगने लगा है और जब ग्राहकी की सरिता का वेग तीव्रता के साथ होगा, तब की स्थिति की कल्पना की जा सकती है। बहु आशाविद उद्यमियों का कहना है कि मांग में बढ़ोतरी इस कदर जारी होगी कि उत्पादक पूरी कोशिशों के बाद भी उन्हें पूरी करने में सफल नहीं हो सकेंगे। सामान्य से सामान्य आदमी अपने कार्य से असीम संतुष्टि को प्राप्त कर संतोष कर सकेगा।

आने वाली सीजन की अवधि लंबी है और बाजार का रुख करना घनात्मक होने से वस्त्र रंगाई छपाई के उद्योग में नए जीवन का सूत्रपात होगा। वर्चस्व उद्यमी जिनके उत्पादन में गुणवत्ता व नाम का समावेश है, उनको अपने कार्य विस्तार के लिए सुनहरा अवसर प्राप्त होगा। अबतक जो क्रियाएं स्थगित अवस्था में रही, उनमें स्वत: जान आएगी और उत्पादन बढऩे हेतु उद्यमी हर संभव प्रयास में लगे रहेंगे। मांग की धारा जिस प्रबल वेग से बहने की संभावना व्यक्त की जा रही है, उससे लगता है कि नवीनतम मशीनों के स्थापित होने की राह निकलेगी। श्रमिकों की भारी कमी जो अभी अधिकतम राशि के उपरांत भी दिख रही है, इसके लिए स्वचालित मशीनें ही एक मात्र विकल्प है। वर्तमान में उद्यमी गहरी सोच लेकर चलते हैं, अत: क्षेत्र के रंगाई छपाई और उद्योग में स्थापित होने वाला परिवर्तन क्षेत्र की स्थाई समृद्धि और शांति का वाहक बनेगा।

देश की अन्य उत्पादक मंडियों की तुलना में बालोतरा जसोल वस्त्र रंगाई छपाई उद्योग की स्थिति बेहतर बनी हुई है। दूसरी मण्डियाँ कुछ विशेष कारणों से उत्पादन करने में सक्षम नहीं बन सकी। मजदूरों के काम पर आना इसका विशेष पहलू है। स्थानीय उत्पादक समय और परिस्थितियों को भांप कर अपने उत्पादन को ढ़ालने में माहिर हैं। ‘नो रिस्क नो गेन’ के सूत्रों को अंगीकार कर अपनी हिम्मत के बल पर कुछ करने के लक्ष्य के परिणाम स्वरूप अपना रास्ता बना लेते हैं। औद्योगिक क्षेत्र के कई संस्थान क्वालिटी के साथ कुछ नया देने के धुन के कारण ऐसे छा गये, जिसकी कल्पना भी नहीं थी। नाइटी क्लॉथ, पेटिकोट, रेयॉन (प्लेन और प्रिण्ट) की धूम ने भारत के सभी मंडियों को चकित कर दिया। पोपलिन का दबदबा तो ज्यों का त्यों बरकरार है परंतु इसके उत्पादक अब गिने चुने ही हैं, जो युनिटों के प्रारंभ से गुणवत्ता की बदौलत अपने ब्रांड की इमेज बना सके। उनके पास आज भी ऑफरों की भरमार है। खादी केशमेन्ट के निर्माताओं ने इस डल सीजन में भी शानदार कार्य को अंजाम दिया। इन दिनों तकनीकी सुस्ती का एहसास हो रहा है, परंतु आगे की सुनहरी सीजन के आभास से उत्पादक खुलकर उत्पादन लेने में मशगूल हैं। उद्यमियों के दिलों में कुछ बातें गहरी वेदना देने वाली है। सेवा का पर्याय अब अर्थ उपार्जन हो गया है। जो विभाग उद्योग को परिपक्वतापूर्ण विस्तार के लिए संजोये गए थे, वह अपना प्रमुख उद्देश्य भूलकर लाभार्जन में सचेष्ट हैं। रिको का मूल ध्येय आतुर और इच्छुक उद्यमियों को राहत देकर खड़ा करने का है, इसके विपरीत प्लाट आवंटन की प्रणाली भी अलग कर दी। रेट निर्धारित करने में रिको ने केवल आर्थिक लाभ को ही अपना मूल उद्देश्य बना दिया है। बालोतरा क्षेत्र में रिको ने मनमाने ढंग से दर तय कर रिकॉर्ड ही बना दिया है। प्रदेश भर में संभवत: यहां की रेटें सर्वाधिक हैं। इससे सामान्य व्यक्ति उद्योग लगाने से महरूम हो जाता है। वर्तमान स्थिति में प्लॉट खरीदने में सक्षम वे ही हैं, जो व्यवसायिक स्तर पर इसे प्राप्त करते हैं। औद्योगिक संस्थानों को आगे आकर तर्क संगत दरें निर्धारित करने हेतु पुरजोर पैरवी करनी चाहिए। व्यक्तिगत तौर पर शिकायत अर्थपूर्ण होने के बावजूद भी स्तर पा नहीं सकती, तथापि सामुहिक प्रयास निश्चित रूप से सुफल देने में उपयोगी साबित हो सकते हैं। राज्य सरकार को सही स्थिति से अवगत करने का साहस किया जाए, तो निश्चित रूप से औचित्यपूर्ण समाधान का रास्ता साफ हो सकता है।

औद्योगिक क्षेत्र इन दिनों कीचड़ और निस्तारित जल से भरा पड़ा है। सडक़ों पर फैले इस जल से कितनी परेशानियाँ आवागमन में होती है, इसका अंदाजा ही लगाया जा सकता है। मुख्य सडक़ के साथ ही संपर्क सडक़ों के उद्यमियों की हालत का बखान करना भी दुश्कर है। रिको प्रशासन को व्यक्तिगत सोच लेकर औद्योगिक क्षेत्र की सौंदर्य वृद्धि व आमजन के आवागमन का सुविधा की तरजीह देनी नितांत आवश्यक है।

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