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त्यौहारी सीजन में लौटेगी बाजार में रौनक: इंडिगो चैक्स, कॉटन लिनन और शत प्रतिशत लिनन शर्टिंग की बढ़ी मांग

त्यौहारी सीजन में लौटेगी बाजार में रौनक: इंडिगो चैक्स, कॉटन लिनन और शत प्रतिशत लिनन शर्टिंग की बढ़ी मांग

By: Textile World Date: 2020-10-22

मुंबई/ रमाशंकर पाण्डेय

कमजोर ग्राहकी और बढ़े आर्थिक संकट से कपड़ा बाजार में स्थिति दुविधाजनक है। अधिकमास समाप्त होने के साथ ही नवरात्रि, पूजा, दशहरा एवं दीपावली जैसे बड़े त्यौहारी की ग्राहकी सामने होने से बाजार में थोड़ी हलचल शुरू हो रही है। व्यापारियों को इन त्यौहारों के समय कपड़ों में अच्छी ग्राहकी रहने की उम्मीद है। पिछले करीब छह से सात महीने तक मंदी से जूझ रहे कपड़ा बाजार को एक अच्छी ग्राहकी का इंतजार है, जो संभवत: इस त्यौहारी सीजन में मिल सकती है। ग्रे कपड़ों का उत्पादन अभी 50 प्रतिशत से अधिक नहीं है। प्रोसेस इकाईयों में भी कामकाज कम ही हो रहा है। इस त्यौहारी सीजन में बिक्री बढ़ाने के लिए सभी ने कमर कस ली है।

 

निर्यात में कामकाज बढऩे के भी संकेत मिल रहे हैं। चीन से मोहभंग होने के बाद अमेरिका एवं यूरोप के आयातकों की नजर अपनी जरूरतों की पूर्ति के लिए अब भारतीय बाजारों पर है। होम टेक्सटाइल के क्षेत्र में भारत की अमेरिकी बाजार पर पहले से ही अच्छी पकड़ है। इस खंड में कई कारणों से मांग लगातार बढ़ रही है। अब प्रोसेस्ड कपड़ों की निर्यात मांग भी अमेरिका एवं यूरोप से बढऩी शुरू हो गई है। यदि इसी तरह से कपड़ों की अन्य वेराइटी की निर्यात मांग बढ़ती है, तो यह कपड़ा उद्योग के लिए बहुत ही शुभ संकेत है क्योंकि देश के  तमाम बाजारों में अभी कोरोना का भय समाप्त नहीं हुआ है, उद्योग-धंधे पूरी तरह से खुले नहीं हैं, इससे देसी ग्राहकी कमजोर रहने का अनुमान है।

 

पिछले कई महीने से मांग में अनिश्चितता होने के कारण कपड़ों में कारोबार बहुत कम रहा था। कोरोना महामारी के कारण सूटिंग, शर्टिंग, साड़ी, डे्रस मटीरियल, धोती, ब्लाउज पीस, ग्रे कपड़ा, होम टेक्सटाइल सहित कपड़ों की अन्य वेराइटी का उत्पादन तथा उसकी बिक्री के साथ प्रोसेसिंग, डाइंग एवं प्रिंटिंग की गतिविधियां बाधित होने से इस उद्योग की पूरी सप्लाई चैन चरमरा गई थी, लेकिन जब से अनलॉक की प्रकिया शुरू हुई और एक के बाद एक ढ़ील देने से स्थानीय बाजारों में कारोबार सामान्य होने की दिशा में बढ़ रहे हंै। व्यापारियों को लगता है कि नवरात्रि से शुरू हो रहे त्यौहारी सीजन में कारोबार सुधरने की संभावना से रुख धीरे-धीरे बदलेगा एवं फि र से चमक आजाएगी।

दीपावली से पहले बाजार में रौनक लौटने की संभावना बढ़ी है। बाजार नहीं चलने के पीछे हाल पैसे की तंगी सबसे बड़ा रोड़ा माना जा रहा है। अब केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों के हाथ में दीपावली से पूर्व खरीदी करने का सुनहरा अवसर देकर बाजार को मोडऩे की कोशिश की है। व्यापारियों को कहना है कि इसका सकारात्मक असर बाजार पर पड़ेगा, रिटेल में कारोबार बढ़ेगा तो इसका कुछ अंश कपड़ों, विशेषकर गारमेण्ट इत्यादि की खरीद पर भी खर्च होगा। यदि निजि क्षेत्र की कंपनियां भी इसी तरह की कोई स्कीम अपने कर्मचारियों के लिए लाती है, तो सरप्लस धन से न सिर्फ  कपड़ा बाजार बल्कि अन्य रिटेल मार्केट में भी तेजी आएगी, जो अभी तक मंदी के शिकार रहे है।

 

मुंबई, सूरत, अहमदाबाद के कपड़ा बाजारों के बीच ऐसा मेलजोल है कि ये अन्योन्याश्रित है। लोगों की खरीद शक्ति घटने के कारण तमाम बाजारों में मांग घटी है। जेतपुर की डाईंग एवं प्रिंटिंग में मांग साधारण है, लेकिन मीडियम एवं सस्ते डे्रस मटीरियल एवं साडिय़ों की मांग खुल जाने से टे्रंड बदल रहा है। मुंबई के प्रमुख उत्पादन केंद्रों पर ग्रे कपड़ों का उत्पादन बढऩे लगा, तो इसका असर ग्रे कपड़ों पर देखा जा रहा है। मुंबई के निर्यातकों की अफ्रीका के लिए खरीदी हो रही है। लोकल मार्केट में अभी मांग कम है, परंतु नवरात्रि के साथ जो त्यौहारी ग्राहकी बाजार में निकलेगी, वह लंबे समय तक रह सकती है, क्योंकि कपड़ों का उत्पादन सीमित रखा गया है।

फैब्रिक्स तथा एपेरल की निर्यात मांग में सुधार हो रहा है, हालांकि वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए यह सुधार मामूली है लेकिन यह कपड़ा उद्योग के लिए एक अच्छा संकेतक भी माना जा रहा है, पर चिंता इस बात की है कि स्थिर रहा कॉटन यार्न और रुई के भाव बढ़ रहे हैं। कॉटन यार्न की तेजी से कॉटन नीटेड कपड़ों का भाव 40 से 50 रू तक बढ़ गए हैं। प्रोसेस कपड़ों की मांग पहले से कुछ बेहतर हुई है। मुंबई के निकट शहरों में स्थिति प्रोसेस हाउस एवं डाईंग कारखानों में श्रमिकों के अभाव में प्रोसेस का काम एक ही पाली में हो रहा है। कमोबेश ऐसी स्थिति सूरत की भी है। जहां वीविंग बढ़ा है लेकिन प्रोसेस हाउसों में कामकाज 30से 40 प्रतिशत के बीच अटका पड़ा है।

 

इंडिगो चेक्स शर्टिंग, कॉटन लिनन शर्टिंग और 100 प्रतिशत लिनन शर्टिंग की मांग निकली है। इंडिगो चेक्स 50’’पना का हाजिर भाव 100 रू है।100 प्रतिशत लिनन शर्टिंग का भाव 400 रू तक है, तो हल्के लिनन दिसावरी मंडियों में 120 रू के भाव बिकता है। इन कपड़ों को लिनन लुक की फि निश दी जाती है। यार्न डाईड चेक्स शर्टिंग 40/40,108/76 रेपियर लूम 61’’ पना ग्रे का भाव 80 रू है, तो 58’’फिनिश शर्टिंग का थोक भाव 95 रू है। गोपालजी 44’’पना का प्रतिवॉर भाव 100 रू है। गोपालजी शर्टिंग का आयात चीन, इंडोनेशिया, वियतनाम, कम्बोडिया से होता है। चीन से आयात बंद है। पहले से आयात रेमी 54’’ पना शर्टिंग का भाव 255 रू है,तो 58’’पना का 275 से 280 रू है।

 

ग्राहकी का समर्थन नहीं मिलने से कॉटन ग्रे कपड़ों के बढ़े भाव आधे हो गए हैं। सूती केम्ब्रिक अच्छी क्वालिटी के ग्रे का भाव 33 से 34 रू के बीच है, तो सेमी क्वालिटी का भाव 31 से 32 रू के बीच चल रहा है। एयरजेट लूम की साटीन 60/60, 165/104, 63’’पना सुपर क्वालिटी का भाव 68 रू है, जो पहले 70 रू था उसके बाद घटकर 63 रू हो गया। इचलकरंजी में धोती के लूमों पर कैम्ब्रिक में बदल देने के बाद धोती का उत्पादन घटने से भाव प्रति जोड़ा 7 से 8 रू बढ़ गए हैं। सूती 64/56, 9 मीटर 47’’पना ग्रे जोड़ा का भाव बढक़र 176 रू हो गया है, वहीं पीसी का भाव 126 रू है। ब्लाउज की ग्राहकी खुली नहीं है और उत्पादन कम है व इसका भाव स्थिर है। 

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