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भारत के अतिरिक्त विश्व में कॉटन उत्पादन कम होने का अनुमान

भारत के अतिरिक्त विश्व में कॉटन उत्पादन कम होने का अनुमान

By: Textile World Date: 2020-10-13

आईसीएससी ने उत्पादन अनुमान घटाए : खपत में होगी वृद्धि

नई दिल्ली/ राजेश शर्मा

इंटरनेशनल कॉटन एडवाईजरी कमेटी (आइसीएसी) ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में विश्व में 2020-21 के दौरान कॉटन उत्पादन का अनुमान गत वर्ष की तुलना में कम किया है, जबकि खपत में वृद्धि की संभावना व्यक्त की है। कमेटी ने अपनी अक्टूबर की रिपोर्ट में कहा है कि विश्व में भारत को छोडक़र सभी देशों में कॉटन का उत्पादन कम होने का अनुमान है और कुल उत्पादन 246 लाख टन हो सकता है, जबकि 2019-20 में इसका उत्पादन अनुुमान 260.20 लाख टन का था। उनका कहना है कि भारत में कॉटन का उत्पादन 62 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि गत वर्ष 60.7 लाख टन था। चीन में उत्पादन 5 लाख टन बढक़र 58.5 लाख टन हो सकता है, जबकि अमेरिका में 37.2 लाख टन होने का अनुमान है क्योंकि वहां पर तूफान से फ सल को नुकसान की आशंका है। गत वर्ष वहां उत्पादन 43.4 लाख टन था। पाकिस्तान में 13.2 लाख टन से घट कर 11.9 लाख टन रह सकता है, क्योंकि वहां पर किसानों ने कॉटन के बजाए धान, गन्ना, मक्का आदि की बुआई अधिक की।

ब्राजील में 29.3 लाख टन से गिर कर 25.1 लाख टन रह जाने की आशंका है। अन्य देशों में 43.9 लाख टन से घट कर 4.51 लाख टन रह सकता है। पश्चिमी अफ्रीका में उत्पादन 20 प्रतिशत घट कर 10 लाख टन ही रहने का अनुमान है और इसका प्रमुख कारण भाव कम होने से किसानों की दिलचस्पी कम होना है। कमेटी के अनुसार कोविड के कारण वहां से निर्यात प्रभावित हुआ और इसका असर भाव और उसके बाद बुआई पर पड़ा। माली में भी कॉटन की बुआई बुरी तरह प्रभावित हुई।

खपत में वृद्धि...कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार 2020-21 के दौरान विश्व में कॉटन की खपत बढक़र 243.4 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि इससे पूर्व वर्ष 228.7 लाख टन होने की संभावना थी क्योंकि वैश्विक अर्थ-व्यवस्था में सुधार आरंभ हो गया है। इसका मानना है कि हालांकि मार्च-अपे्रल में पूरी तरह बंदी के बाद अब व्यापारिक गतिविधियों में सुधार हो रहा है, लेकिन कोविड-19 महामारी का संकट बरकरार रहने से विश्व में गारमेंट की मांग के बारे में अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। उल्लेखनीय है कि विश्व के प्रमुख देशों में कोविड-19 के प्रकोप को रोकने के लिए ही लॉकडाऊन किया था और इससे ही आर्थिक मंदी आई, लेकिन कोरोना वायरस का डर अब भी बना हुआ है और भारत सहित अनेक देशों में इसके मामलों में वृद्धि हो रही है, जो आर्थिक विकास को प्रभावित कर रही है। कोविड-19 के कारण ही 2019-20 के दौरान विश्व में कॉटन की खपत गिर कर 228.7 लाख टन रह गई थी, जबकि इससे पूर्व वर्ष में खपत लगभग 226 लाख टन थी। चीन में कॉटन का उत्पादन बढक़र 79 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि गत वर्ष वहां पर मांग 72.5 लाख टन  की थी। चीन विश्व में कॉटन का सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है और कुल खपत में उसकी हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत है। चीन कॉटन का सबसे बड़ा आयातक देश भी है। भारत में भी कॉटन की मांग 44.5 लाख टन से बढ़ कर 51.3 लाख टन होने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार विश्व की कुल कॉटन खपत में चीन और भारत में ही लगभग 50 प्रतिशत की खपत होती है। पाकिस्तान में कॉटन खपत में मामूली कमी का अनुमान है जबकि फ्रांस, तुर्की, वियतनाम बांग्लादेश, अमेरिका आदि में खपत में वृद्धि होगी।

वैश्विक कारोबार... कमेटी का कथन है कि 2020-21 में कॉटन का वैश्विक कारोबार 91.8 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि गत वर्ष 89.1 लाख टन का था। हालांकि अमेरिका से कॉटन का निर्यात लगभग 20,000 टन घट कर 3.18 लाख टन रह सकता है, लेकिन कुल निर्यात में उसका हिस्सा लगभग 33 प्रतिशत रहेगा। चीन, बांग्लादेश, वियतनाम आदि का आयात गत वर्ष के मुकाबले

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