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रेयॉन की मांग जबरदस्त, उत्पादन में सुधार

रेयॉन की मांग जबरदस्त, उत्पादन में सुधार

By: Textile World Date: 2020-10-10

बालोतरा/ एल सी पुनीत

कोरोना महामारी की वीभत्स गर्दिश की धुंध यथावत्  यत्र तत्र सर्वत्र वातावरण में विद्यमान है। युवा वर्ग शंकित अवस्था में कार्यरत है, परन्तु उम्र दराज लोगों में भय और नैराश्य की झलक स्पष्ट प्रतिबिम्बित हो रही है। औद्योगिक क्षेत्र में कार्य प्रक्रिया उत्पादन को लेकर गतिशील है, परन्तु सारी दौड़ धूप में युवा उत्पादकों की ही धूम नजर आती है। सभी कुछ समय के साथ होने को आतुर है, तथापि नैराश्य का मुलम्मा छिपता नहीं है। समय के विशेष थपेड़ों से आहत स्थानीय वस्त्र रंगाई छपाई उद्योग अस्तित्वहीन होने के कगार पर था, किन्तु उद्यमियों की हिम्मत और हांैसलों के कारण पुन: पटरी पर आने को उद्यत है। फिलहाल बनी स्थिति से संतोष किया जा सकता है। देश की प्राय: कई उत्पादक मण्डियां अभी भी व्यवस्थित नहीं हो सकी हैं, परन्तु यह क्षेत्र सक्रियता के साथ अपनी पूर्व पहचान को स्थापित करने में सफलता का वरण कर रहा है।

 

स्थानीय सभी उत्पादों का वर्चस्व भले ही नहीं निखरा हो, परन्तु प्लेन और प्रिण्टेड रेयॉन ने तो करिश्मा ही कर दिया है। माल पूरी कोशिशें के बाद भी मांंग के अनुपात में बहुत कम तैयार हो पा रहा है। लोग माल के  लिये कतार लगाये हुए हैं। एडवान्स पेमेण्ट का धारा है, फिर भी आंशिक माल पूर्ति भी विलम्ब से हो पा रही है, इसमें भी त्यौहारी संतोष व्यक्त कर रहे हैं। उद्यमी रेयॉन के माल को रात दिन एक कर तैयार करने को सक्रिय हैं, फिर भी मांग तो मांग ही है। कई उद्यमियों ने तो अपना पूर्ववत् नियमित उत्पादन को एक तरफ रख कर रेयान में ही सारा ध्यान केन्द्रित कर दिया है। यह कार्य अच्छा लाभ  देने वाला बताया जा रहा है। नाईटी प्रिण्ट का रुतबा ज्यों का त्यों बरकरार है। विशिष्ट नामचीन उत्पादकों की इमेज में चार चाँद लगे हैं। उनके पास ऑफरों का भण्डार है। माल की चालानी में विलम्ब का कारण उनके पास तैयार माल का अभाव है। नाईटी के बाजार की खुमारी से प्रभावित हो कई नये उत्पादक नाईटी उत्पादन प्रारम्भ कर अपना भाग्य आजमाने आगे आ रहे हैं। नये उत्पादकों का कहना है कि प्रोसेस के हर कार्य में उन्हें प्राथमिकता के बजाय द्वितीय स्थिति मिलती है, जिससे उन्हें असंतोष रहता है।

 

पोपलीन की मांग में अच्छा सुधार दृष्टिगोचर हो रहा है, किन्तु इसका लाभ वे ही उठा रहे हैं, जिनके ब्राण्ड की इमेज है। सामान्य उद्यमी के पास माल खपत का जरिया कम है। साधारण पेटीकोट में भी अब उपभोक्ताओं का नजरिया बदलने से अच्छे कपड़े की डिमाण्ड बढ़ रही है। पेटीकोट का कार्य तो व्यवस्थित है, परन्तु कारीगरों की कमी से माल कम तैयार हो रहा  है, हालांकि मशीनों की संख्या में निरन्तर वृद्धि हो रही है। ग्रे बाजार, रंग रसायन, पैकिंग मेटेरियल की लेवाली में विशेष दम नहीं है। इतना होने पर भी उद्यमियों को आगे की सीजन अच्छी चलने की धारणा पक्की है।

 

पूर्व विदेश, रक्षा और वित्तमंत्री श्री जसवंत सिंह जसोल के निधन से अपूरणीय क्षति का अहसास हुआ। राजनैतिक क्षेत्र से परे भी उनमें साहित्यिक, सांस्कृतिक व उन्मुक्त वातावरण की पारदर्शी भावनाऐं समाहित थी। उन्होंने ऐम्स निर्माण के साथ जसोल बालोतरा के प्रदूषण निवारण हेतु सराहनीय योगदान दिया। उनके व्यक्तित्व की अलख सदा स्मरणीय रहेगी। क्षेत्र वासियों ने अन्तर्मन से भाव भीनी श्रद्धांजलियाँ दी और आत्मिक शान्ति के लिये ईश्वर से प्रार्थना की।

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