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थोक बाजार में लौटी रौनक, आम ग्राहकी का अभी इंतजार

थोक बाजार में लौटी रौनक, आम ग्राहकी का अभी इंतजार

By: Textile World Date: 2020-10-07

नई दिल्ली / राजेश शर्मा

दिल्ली कपड़ा बाजार में गत कुछ दिनों से कारोबार गति पकड़ रहा है। हालांकि कोविड-19 पूर्व की स्थिति से कम है, लेकिन जानकारों का कहना है कि एक माह पूर्व की स्थिति से ग्राहकी काफी अच्छी है। अब बाजार में वैवाहिक सीजन की ग्राहकी जोर पकड़ती नजर आ रही है, लेकिन आम ग्राहकी या त्यौहारी ग्राहकी के बारें में अभी संदेह है। बाजार में धन की तंगी बनी हुई है, क्योंकि रिटेलर से पैसा नहीं आ रहा है तथा थोक व्यापारी भी अब उधार देने में सतर्कता बरत रहे हैं।  व्यापारियों के अनुसार पहले ही उधारी लगभग 8 महीने की हो चुकी है तथा पुरानी रकम की वापसी कब तक पूरी होगी, इस बारे में भी अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। व्यापारियों का कहना है कि आलोच्य पखवाड़े के आरंभ में कारोबार धीमा था, लेकिन बाद में वैवाहिक ग्राहकी में लगातार सुधार होने लगा है।

 

सूत्रों के अनुसार अभी तक कारोबार गत वर्ष की तुलना में काफी कम है, लेकिन ऐसा लगता है कि अब इसमें सुधार का दौर बना रहेगा, हालांकि गत वर्ष के स्तर पर तक पहुंच पाना एकदम असंभव लग रहा है और इसका कारण कोविड-19 के कारण अर्थव्यवस्था का पटरी से लगभग उतरना है। व्यापारियों के अनुसार इसमें कोई संदेह नहीं है कि बाजार में कारोबार में सुधार हुआ है  लेकिन इस समय अधिकांश मांग केवल  त्यौहारी सीजन की ही है, क्योंकि कोविड-19 के कारण शादियां कुछ समय के लिए स्थगित कर दी गई थी। अब बाजार में जो भी ग्राहक आ रहा है वह केवल वैवाहिक सीजन के आईटमों जैसे लहंगा, साड़ी, लेडीज सूट, लेने-देने के लिए जोड़ा पैकिंग या जेन्ट्स सूट आदि। वैवाहिक मांग के दम पर कारोबार में सुधार हो सकता है,  लेकिन पहले के स्तर पर नहीं पहुंच पाएगा। वास्तव मेें रोजमर्रा के पहनने के लिए पेन्ट-शर्ट आदि की मांग बाजार में सीमित ही है। व्यापारियों के अनुसार वैवाहिक साडिय़ों, लेडीज सूट, लंहगे आदि की मांग बनी हुई है और आने वाले दिनों में जैसे-जैसे वैवाहिक तिथियां करीब आऐगी, इनकी मांग में और सुधार होगा। बहरहाल, अधिकांश व्यापारियों को आने वाले महीनों में त्यौहारी मांग के बारे में अभी संदेह है और उनका कहना है कि कम होते रोजगार और कोविड के बढ़ते मामलों को देखते हुए ऐसा नहीं लगता है कि दुर्गा-पूजा, दशहरा या दीपावली आदि पर कोई जोश उपभोक्ताओं में देखने को मिलेगा।

 

बुकिंग में रुचि नहीं... सूत्र बताते हैं कि थोक व्यापारियों की सूटिंग-शर्टिंग आदि की बुकिंग में कोई खास दिलचस्पी नजर नहीं आ रही है। रिटेलर भी बुकिंग में कोई खास रुचि नहीं ले रहे हैं। हालंकि विगत दिनों डोनियर, सियाराम आदि ने वर्चुअल बुकिंग की थी, लेकिन कोई खास उत्साह रिटलरों  में नजर नहीं आया। व्यापारियों का कहना है कि डिस्काउण्ट या स्कीम के कारण माल पकडऩे का कोई लाभ नजर नहीं आ रहा है, क्योंकि आगे स्थिति अनिश्चित है। पैसा फसाने का अब कोई लाभ नजर नहीं आ रहा।

 

सीमित मांग... जानकारों के अनुसार रिटेल काउण्टर पर अभी केवल सीमित मांग है और जब तक वहां पर उठाव नहीं होगा, थोक बाजार में ग्राहकी नहीं आएगी। उल्लेखनीय है कि एक बड़े वर्ग द्वारा वर्क फ्रॉम होम करने से भी दैनिक प्रयोग में होने वाले वाले कपड़ों यानि पेंट-शर्ट आदि की मांग पर पर असर पड़ा है और यही कारण है कि रिटेलर काउंटर यानि कालोनियों में फैब्रिक की मांग कमजोर है। इसके अतिरिक्त ऑन लाईन शापिंग के बढ़ते चलन के कारण भी रिटेल काउंटरों पर फैब्रिक का कारोबार प्रभावित हो रहा है। व्यापारियों के अनुसार मिलों पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ रहा, क्योंकि उनका कपड़ा तो कहीं न कहीं कट ही रहा है।

 

धन की तंगी... व्यापारी बताते हैं कि अनेक महीनों से उधारी अटक जाने के कारण बाजार में धन की तंगी बनी हुई है। अनेक रिटेलरों का उधार 7-8 महीने का हो गया है और जो भुगतान आया, वह भी छोटी-छोटी किश्तों में आया है। अब हाल यह है कि थोक व्यापारी उधारी में काफी सतर्कता बरत रहा है। उसका प्रयास है कि उतना ही माल दे, जितना भुगतान आया है। वह अब अधिक रकम व्यापारी की ओर अटकाने में विश्वास नहीं कर रहा है। दूसरी ओर अनेक थोक व रिटेलर भी उतना ही माल खरीद रहे हैं, जिससे उनकी तुरंत की जरुरत पूरी हो जाए।

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