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राजस्थान में सरकारी स्कूल की यूनिफॉर्म हुई चेंज, नई यूनिफॉर्म के कलर-डिजाइन पर सस्पेंस

राजस्थान में सरकारी स्कूल की यूनिफॉर्म हुई चेंज, नई यूनिफॉर्म के कलर-डिजाइन पर सस्पेंस

By: Textile World Date: 2020-09-29

भीलवाड़ा/ सत्यप्रकाश

राज्य में कांग्रेस शासित राजस्थान सरकार ने सरकारी स्कूल्स में यूनिफॉर्म चेंज करने की घोषणा कर दी है। राज्य के शिक्षा मंत्री श्री गोविंद सिंह डोटासरा ने यूनिफॉर्म चेंज करने की औपचारिक घोषणा तो कर दी है, लेकिन यूनिफॉर्म का कलर क्या रहेगा तथा कब से चेंज होगी, इस पर सस्पेंस बनाए रखा है। हालांकि केंद्र सरकार ने नीजि शिक्षण संस्थानों में यूनिफॉर्म बदलने की 5 वर्ष समय सीमा निर्धारित कर रखी है लेकिन राजस्थान में जब से कांग्रेस पार्टी की सरकार बनी है, तब से यूनिफॉर्म बदलने की बात करती रही है। अभी सरकारी स्कूल में यूनिफार्म बदले हुए 3 वर्ष ही हुए हैं, ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि सरकार इस बात को लेकर इतनी जल्दबाजी में क्यों है और अगर यूनिफॉर्म ही बदलनी थी, तो दिसंबर जनवरी में ही इसकी घोषणा करनी चाहिए थी।

 

स्कूल खुलने का पता नहीं और यूनिफॉर्म बदल दी... राज्य सरकार के मंत्री महोदय द्वारा कोरोना महामारी के इस दौर में यूनिफार्म बदलने की घोषणा निश्चित तौर पर किसी के भी हित में नहीं है। सरकारी स्कूल्स में वैसे भी आम आदमी के बच्चे पढ़ते हैं और उन पर नई यूनिफार्म का बोझ लादना ऐसे समय में सर्वथा अनुचित है। इसी तरह की प्रतिक्रिया हमें यूनिफॉर्म के कपड़े का उत्पादन करने वाली प्रमुख मंडी भीलवाड़ा के कपड़ा निर्माताओं से मिल रही है कि बीच मझधार में यूनिफार्म बदलने का निर्णय विचलित करने वाला है। अभी तो स्कूल खुलने का ही पता नहीं है और यूनिफॉर्म बदलने की घोषणा कर दी। एक जानकार निर्माता ने कहा कि सरकारी स्कूल्स में इस समय न तो नए सेशन शुरू हो पाए हैं और आगे भी भविष्य की कोई पुख्ता गाइडलाइन नहीं है। ऐसे में यूनिफॉर्म बदलना यूनिफॉर्म ट्रेड से जुड़े व्यवसायियों के लिए इस कोरोना काल में थप्पड़ जडऩे जैसा है।

 

महामारी में यूनिफॉर्म बदलना अनुचित -श्री रवि अग्रवाल...

स्थानीय मंडी के जाने-माने उद्यमी श्री रवि अग्रवाल काफी लंबे समय से यूनिफॉर्म सेक्टर के लिए कपड़ा बना रहे हैं। दयानंद टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज के नाम से संचालित इनकी कंपनी केएसएम ब्रांडनेम से यूनिफॉर्म सेक्टर के लिए बेहतरीन कपड़ा बना रही है। चूंकि श्री अग्रवाल स्वयं यूनिफॉर्म ट्रेड से हैं तो इन्हें इस समय यूनिफॉर्म बदलने से ट्रेडर्स एवं निर्माता को क्या नुकसान हो सकते हैं इसकी पूरी जानकारी है। ऐसे में हमने इनसे बात की तो काफी चौंकाने वाले आंकड़े सामने आये। श्री अग्रवाल ने कहा कि पहली बात तो यह है कि इस समय यूनिफॉर्म बदलकर केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नियम का उल्लंघन राज्य सरकार कर रही है, क्योंकि केंद्र सरकार ने निजी शिक्षण संस्थानों में कम से कम 5 वर्ष के समय अंतराल में यूनिफॉर्म बदलने का प्रावधान किया हुआ है, लेकिन राज्य सरकार ने इसकी परवाह किए बगैर 3 वर्ष में ही यूनिफॉर्म बदलने की घोषणा कर दी। यूनिफॉर्म बदलने से बच्चों के माता-पिता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ेगा, वहीं कपड़ा इंडस्ट्रीज को भी इसमें भारी नुकसान होगा। भीलवाड़ा मंडी देश में सर्वाधिक यूनिफॉर्म का कपड़ा बनाने वाली मंडी है। यहां पर कई निर्माताओं ने राजस्थान की सरकारी स्कूल में चलने वाली यूनिफार्म का कपड़ा भारी मात्रा में बना रखा है। जून-जुलाई से नए सेशन स्टार्ट होते हैं, जिसकी प्लानिंग कपड़ा निर्माता को 5 से 6 माह पूर्व करनी होती है। इसके लिए स्थानीय निर्माता तो दिसंबर से मार्च तक यूनिफॉर्म का कपड़ा बनाने में व्यस्त रहते हैं। फिर अप्रैल-मई में इसकी डिस्पेच की जाती है, लेकिन इस बार कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन लग गया, इसलिए कपड़ा डिस्पैच ही नहीं हो पाया। अब सरकार का यूनिफॉर्म बदलने का फैसला स्थानीय इंडस्ट्री को भारी नुकसान में धकेलने जैसा है, वहीं सरकार ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि नया कपड़ा कैसा होगा व कब से लागू होगा? इस पर फिलहाल चुप्पी साध रखी है। अगर सरकार 2021 से इसे बदलने की घोषणा करती है, तब तो मंडी में कपड़ा निर्माताओं को थोड़ा समय मिल जाएगा, फिर भी पुराने माल का नुकसान तो तय है।

 

आमजन पर बढ़ेगा अनावश्यक बोझ... कोरोना महामारी ने हर तरफ कोहराम मचा रखा है, ऐसे दौर में यूनिफॉर्म बदलना राजस्थान की जनता के साथ ज्याद्ती ही कहा जाएगा। जानकार सूत्रों के अनुसार अगर सरकार की मंशा यूनिफॉर्म बदलने की ही थी, तो यह निर्णय दिसंबर 2019 में ही हो जाना चाहिए था। एक ओर आम आदमी जहां बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहा है, वहीं सरकार अपना हित साधने में लगी हुई है।

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