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आपदाकाल में नये अवसर तलाशते कपड़ा कारोबारी

आपदाकाल में नये अवसर तलाशते कपड़ा कारोबारी

By: Textile World Date: 2020-09-24

एण्टी कोरोना फैब्रिक्स एवं वर्चुअल ट्रेड फेयर्स के माध्यम से बाजार में हलचल के  प्रयास

सत्यप्रकाश/ कोरोना महामारी के कारण हुई टेक्सटाइल उद्योग की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है। बड़ी टेक्सटाइल उत्पादक मंडियों के बड़े-बड़े टेक्सटाइल निर्माता भी इस महामारी के अंत का इंतजार कर रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2020-21 आधा बीत जाने के बाद इसके नुकसान का आकलन करें तो भयावह आंकड़े निकल कर सामने आ रहे हैं। चौतरफा मंदी की मार से जूझ रहे टेक्सटाइल उद्योग के लिए फिलहाल किसी तरह की राहत की सम्भावना नज़र भी नहीं आ रही है। अप्रैल 2020 से लेकर सितंबर माह तक रिटेल व होलसेल दोनों स्तर पर मात्र 10 से 20 प्रतिशत ग्राहकी कपड़ा उद्योग से जुड़े व्यवसायियों की नींद उड़ाने के लिए काफी है। हमने भारत की लगभग सभी कपड़ा मंडियों में बातचीत कर वस्तुस्थिति का पता लगाने का प्रयास किया तो पता चला कि अब तक तो व्यापारी जैसे तैसे बुरे समय का सामना कर रहे थे, लेकिन अब थक चुके हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि दीपावली के निकट अच्छा कारोबार चल सकता है। अगर यह सही साबित होता है तो शिथिल अवस्था से कपड़ा व्यवसाय उबर सकता है। बाजार सूत्रों के अनुसार इस समय सबसे बड़ी परेशानी पेमेंट की आ रही है। रिटेल बाजार में पिछले 6 माह से ग्राहकी नहीं होने से होलसेलर्स अपने बकाया भुगतान नहीं कर पा रहे हैं।

 

इस प्रथम पहलू के बाद हम दूसरे पहलू पर बात करें तो कोरोना संक्रमण के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे भारतीय कपड़ा उद्योग के लिए राहत की खबर यह है कि हमारे कपड़ा निर्माता एवं व्यापारी हर विपरीत परिस्थिति का डटकर मुकाबला करने में माहिर हैं। इसका ताजा उदाहरण कोराना संक्रमण को रोकने वाले कपड़े का निर्माण करना। मेंस एवं लेडीज वीयर फैशन परिधानों के लिए कई नामचीन कंपनीज ने जून माह में ही वायरस रोधी कपड़ा बनाना शुरू कर दिया था। सियाराम, डोनियर, रेमण्ड, ओनली विमल जैसे बड़े ब्राण्ड्स ने एण्टीवायरस फैब्रिक्स इजाद किया तो बाजार में इसके शुरूआती रूझान बहुत अच्छे रहे, परंतु अब इस कपड़े की मांग भी अपेक्षानुरूप कम ही बताई जा रही है। जानकार सूत्रों के सूत्रों के अनुसार अगर रिटेल एवं गारमेण्ट उद्योग में मांग निकलती है तो ही सब काम सार्थक हैं, अन्यथा सारे प्रयास कुछ सिखाकर तो जायेंगे।

 

वर्चुअल ट्रेड फेयर्स...जहां एक तरफ कोरोना के कारण पूरा वैश्विक समुदाय परेशान है, कई छोटे-बड़े देशों की आर्थिक  व्यवस्था चरमरा गई है। लगभग यही हालात अपने भारत देश के भी हैं। उत्पादन स्तर पर काम कम होने से बेरोजगारी की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। एैसे ही हालात से कपड़ा व्यवसाय झूझ रहा है, लेकिन हमारे देश के कपड़ा व्यवसायी ग्राहकी नहीं होने पर भी आपदाकाल में नये अवसर की तलाश में रहे, जिसके परिणामस्वरूप वर्चुअल टे्रड फेयर्स का फॉर्मूला लॉञ्च किया गया। इस सेक्टर में अहमदाबाद के फाइबर टू फैशन ग्रुप एवं श्री गोविंदम इवेंट कंपनी ने अप्रेल-मई के महीने में इस तरह के इवेण्ट की परिकल्पना को वर्चुअल आकार देना शुरू कर दिया था, जिसकी परिणीति के रूप में आज देश में कई बड़े वर्चुअल ट्रेड फेयर्स का आयोजन किया जा रहा है। इन ट्रेड फेयर्स की खास बात यह है कि व्यापारियों को कहीं आना जाना नहीं है। व्यापारी जहां अपना कार्यस्थल है, वहीं से ही व्यापार कर सकता है यानि व्यापारी को यात्रा करने की बजाए, ऑनलाइन व्यापार करने की सुविधा दी जा रही है, जिसे काफी सराहा भी जा रहा है। हमारी जानकारी के अनुसार इस समय फैब्रिक्स एवं गारमेंट दोनों सेगमेंट में वर्चुअल एग्जीबिशन हो रही है, जिन्हें शायद रिस्पांस भी ठीक-ठाक मिल रहा है। हालांकि इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर व्यापारी कितना टिक पाएंगे, खरीदी कर पाएंगे फिलहाल ये कहा नहीं जा सकता, परंतु व्यापार में एक नया कंसेप्ट आने से टेक्सटाइल उत्पादक एवं रेडीमेड गारमेंट निर्माता इन वर्चुअल फेयर्स में जोश के साथ भाग ले रहे हैं।

 

बोनारो वर्चुअल वस्त्र उत्सव 2020...श्री गोविंदम इवेंट कंपनी द्वारा आयोजित बोनारो वर्चुअल वस्त्र उत्सव 5 से 15 सितंबर तक आयोजित किया गया, जिसमें सूरत के बड़े-बड़े साड़ी सूट लहंगा एवं वेडिंग परिधानों के निर्माताओं ने अपने उत्पादों का डिस्प्ले किया, वहीं इस वर्चुअल समारोह में देश के सबसे प्रतिष्ठित मेंस वियर ब्रांड ‘सियाराम’ ने इस प्लेटफार्म पर अपने उत्पादों का जमकर प्रदर्शन किया। इस संदर्भ में श्री गोविंदम इवेंट कंपनी के श्री भरत हरियाणी ने कहा कि वर्चुअल इवेंट करवाना मेरे लिए बहुत अच्छा अनुभव रहा है व सभी एक्जीबिटर्स एवं व्यापारियों ने आयोजन को काफ़ी सराहा भी है, इसलिए हमने बोनारो वर्चुअल वस्त्र उत्सव 2.0 (द्वितीय) की 13-15 अक्टूबर को आयोजन करे भी कपड़ा उद्योग जगत से जुड़े सभी निर्माता एवं व्यापारियों से मेरा निवेदन है कि वह फिलहाल डिजिटल व्यापार की तरफ ध्यान दें, क्योंकि जब तक कोरोना वायरस की वेक्सीन नहीं आ जाती, तब तक हमें वर्चुअल व्यापार को ही प्राथमिकता देनी होगी।

 

फैबेक्सा वर्चुअल एग्जीबिशन 2020... अहमदाबाद के सबसे बड़े व्यापारिक संगठन मस्कती क्लॉथ मार्केट महाजन द्वारा फैबेक्सा वर्चुअल एग्जीबिशन का आयोजन किया जा रहा है, जिसका 24 अगस्त को गुजरात राज्य के मुख्यमंत्री श्री विजय रूपाणी ने विधिवत शुभारंभ किया। यह एग्जीबिशन 24 अगस्त से लगातार 90 दिन तक चलेगी। फैबेक्सा कमेटी के चेयरमैन श्री बाबूलाल सोनीगरा ने बताया कि इस एग्जीबिशन में अहमदाबाद के सभी नामी-गिरामी टेक्सटाइल फैब्रिक उत्पादक भाग ले रहे हैं। इस वर्चुअल एग्जीबिशन में गारमेंट उत्पादक इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से अपने लिए फैब्रिक्स खरीदी भी कर सकते हैं।

 

गारमेंट वर्चुअल ट्रेड फेयर्स...  इसी तरह क्लोदिंग मैन्यूफैक्चरर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CMAI) एवं गुजरात गारमेंट मैन्युफेक्चरर्स एसोसिएशन (GGMA) भी वर्चुअल ट्रेड फेयर्स कर चुके हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार 10 से 20 सितंबर तक (CMAI) ने 6 सफलतम वर्चुअल प्रदर्शनी आयोजित की, वहीं जीजीएमए ने 15 से 19 सितंबर को वर्चुअल प्रदर्शनी आयोजित की।

 

एंटीवायरस फैब्रिक्स एवं गारमेंट्स...भारत में कोरोना का विकराल रूप नजर आने लगा है। जब हमारे यहां संक्रमण की दर कम थी, तब तो सरकार ने लोक डाउन कर दिया और अब संक्रमण बढ़ रही है तो धीरे-धीरे सभी क्षेत्रों को अनलॉक किया जा रहा है, जिसकी वजह से कोरोना संक्रमण तेज गति से फैल रहा है। ऐसे में हमारे टेक्सटाइल उत्पादकों ने ऐसा कपड़ा तैयार कर लिया है, जो हमें कोरोना संक्रमण अथवा अन्य किसी भी प्रकार के वायरस संक्रमण से बचाएगा, ऐसे वादे टेक्सटाइल कंपनीज द्वारा किए जा रहे हैं। मुंबई, बेंगलुरु, अहमदाबाद, सूरत, भीलवाड़ा, बालोतरा आदि टेक्सटाइल उत्पादक मंडियों में कपड़ा निर्माता एंटीवायरस फैब्रिक बना रहे हैं और इसमें अच्छे व्यवसाय की भी जानकारी मिल रही है। हालांकि अभी इस कपड़े का ज्यादा उपयोग मेडिकल सेक्टर में ही  हो रहा है, लेकिन निर्माता कंपनीज का दावा है कि इस कपड़े से आम आदमी भी संक्रमण से बच सकता है, इसलिए कोरोना से बचाव के लिए एंटीवायरस फैब्रिक की मार्केटिंग पर जोर दिया जा रहा है।

 

वैक्सीन बनेगी, तभी होंगे हालात सामान्य... वर्तमान हालत का जिक्र करें तो इस समय व्यापार की दशा और दिशा ट्रेक पर नहीं है। हमने राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली, बेंगलुरु, अहमदाबाद, चैन्नई, कोलकाता, मुम्बई आदि मण्डियों में कपड़ा व्यवसायियों से बातचीत के दौरान पाया कि हालात काफी विकट हैं। बड़े उत्पादक सेण्टर्स से मजदूरों का पलायन हो चुका है। आवागमन के लिए यात्री ट्रेनें अभी तक चालू नहीं हुई है। ऐसे में जब तक कोविड-19 की दवाई अर्थात् वैक्सीन नहीं बन जाती, तब तक हालात सामान्य होना मुश्किल ही लग रहे हैं।

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