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महामारी के बीच उत्पादन प्रगति पर

महामारी के बीच उत्पादन प्रगति पर

By: Textile World Date: 2020-08-31

बालोतरा/ लालचन्द पुनित

बादलों की उमड़ घुमड़ आकाश में परिलक्षित हो रही है, परंतु वर्षा की अमृत बूंदों के आस्वादन की प्रतीक्षा क्षेत्र में बेसब्री से हो रही है। महामारी अपने प्रचंड रूप से विस्तार को अमलीजामा पहनाने में मशगूल है। वास्तविकता क्या है, इसका निराकरण नहीं हो पा रहा है। स्थिति किं कर्तव्य विमूढ़ सी हो गई है। सावधानियां बरती जा रही हैं, किंतु चूक और गलत फहमियों से परिणाम भयावह ही आ रहे हैं। औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियां भय मिश्रित शीशे की तंग गलियों से गुजरने को मजबूर हैं। प्रश्नचिन्ह ऐसा लगता है कि मन अनमना और अस्थिर सा हो जाता है। ऐसे में भी उद्योगों का अस्तित्व बना हुआ है, यही सर्वाधिक संतोषजनक संदेश का परिचायक है। प्रिंट नाइटी का क्रेज इस स्थिति में भी विद्यमान है, हालांकि आपसी प्रतिस्पर्धा व ग्रे क्लॉथ के भावों में चलती कमी से चालानी पर असर परिलक्षित हो रहा है। उत्पादकों के अनुसार नाइटी का पर्याप्त उत्पादन के न होने से माल की चालानी में अंतर दिखाई पडऩा स्वाभाविक है। उद्यमियों के पास स्टॉक में माल तैयार है ही नहीं। पोपलीन का उत्पादन अब बहुत कम किया जा रहा है, वैसे चालानी भी मामूली स्तर पर स्थिर टिकी हुई है।

ऐसे उत्पादकों को में ब्रांड इमेज धारक प्रतिष्ठानों का दबाव कायम है और अधिकांश चालानी का प्रतिशत भी इन्हीं का है। सिंथेटिक रोटो का उत्पादन आज भी अच्छा बना हुआ है। पोकेटिंग क्लॉथ की कमोबेशी मांग है। टेन्ट क्लॉथ का उठाव ठप्प हो गया है, किन्तु थैली का काम संतोषजनक बना हुआ है। अन्दर स्कर्ट (पेटीकोट) का उत्पादन विभिन्न डिजाइनों में उत्पादन के अनुरूप बराबर बना हुआ है। कई प्रोसेस हाऊसों में यह भी देखा गया है कि माल की अधिकता से माल तैयार होने में विलम्ब भी बहुत हो रहा है। कोरोना महामारी की आँधी की धुन्ध से आच्छादित वातावरण में सभी कार्यों पर किसी न किसी रूप में परत चढ़ी लगती है। सामाजिक रीतिरिवाजों, औद्योगिक गतिविधियों, धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में संक्षिप्तता का बोध स्पष्ट परिलक्षित हो रहा है। निस्संदेह आर्थिक कार्य कलाप सिमट कर इतने संकुचित हो गए हैं कि जीवन जो बचा है, वह भी पर्याप्त लगने लगा है। कुछ भी हो, इस क्षेत्र में लोगों में जो हिम्मत है वह काबिले तारीफ है।

 

परिस्थिति कभी कैसी भी बनी है, परन्तु यहाँ के बाशिन्दों ने निराशा को कभी अपने पर हावी होने नहीं दिया। इसी कारण समय के विषम थपेड़ों से आहत होने के उपरान्त भी यहाँ का वस्त्र रंगाई छपाई उद्योग जर्जर अवस्था में पहुँचता लगने पर भी अब तक विकास के पथ पर अग्रसर होता रहा है। पोपलीन सीटी ऑफ इण्डिया के सरलमना उद्यमी श्री भंवर लाल बांठिया के आकस्मिक निधन से शोक की लहर फैल गई। वैचारिक आदर्शों की सोच में श्री बांठिया को औद्योगिक क्षेत्र में सम्मान प्राप्त था। उद्यमियों व नागरिकों ने अन्तर्मन से संवेदनाएं प्रकट की। श्रमिकों की कमी से प्रभावित उत्पादन की अव्यवस्था को देखकर स्थानीय प्रबुद्ध उत्पादकों ने अपने सभी कार्यों को ओटोमेटिक ढंग से पूर्ण करने की ओर ध्यान देना प्रारम्भ किया है। कातिपय उद्यमियों ने तो इस ओर काफी कुछ परिर्वतन कर अपने उत्पादन के ढाँचे में आशाजनक परिवर्तन भी किये हैं। ये परिवर्तन प्रेरणा बन कर दूसरों को आकर्षित कर रहे हैं।

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