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घरेलू बाजार बुरी तरह प्रभावित: निर्यात क्षेत्र से लूम्स में कुछ मात्रा में हो रहा कार्य

घरेलू बाजार बुरी तरह प्रभावित: निर्यात क्षेत्र से लूम्स में कुछ मात्रा में हो रहा कार्य

By: Textile World Date: 2020-08-26

भीलवाड़ा/ कमलेश व्यास

वैश्विक महामारी ने सम्पूर्ण विश्व की अर्थव्यवस्था को चौपट कर दिया है एवं भारतीय लोगों में अगस्त माह का दौर काफी संक्रमण का रहा, जिसमें कई हॉटस्पॉट बने। लेकिन आशा की बात यह है कि रिकवरी दर में इजाफा हुआ है। लेकिन अभी भी बाजार बुरी तरह प्रभावित है। रिटेल में ग्राहकी नहीं है। सारे तीज त्यौंहार सीमित दायरे में हो चुके हैं। शिक्षण संस्थान बन्द पड़े हुए हैं। सबको वैक्सीन आने का इंतजार है। स्थानीय वस्त्र मंडी में औसतन 40 प्रतिशत कार्य हो रहा है। उसमें पिछले निर्यात ऑर्डर एवं यूनिफॉर्म माल शामिल थे जो अंतिम दौर में है। अब उद्यमियों की निगाहें आगामी समय की ओर है, जिसमें इस महामारी का प्रभाव जैसे तैसे कम होता दिखेगा। प्रशासन कई तरह के निर्णय लेगा, उसी के तहत शिक्षण संस्थान खुलने का भी इंतजार है। क्योंकि स्थानीय वस्त्र मंडी में स्कूली यूनिफॉर्म का बड़ी मात्रा में कारोबार होता है, जो फिलहाल ठहरा हुआ है।

पिछले कई वर्षों में गणेश चतुर्थी से कपड़ा व्यापार गति पकड़ता है। बाजार सूत्रों की माने तो प्रति माह 8 करोड़ मीटर उत्पादन हो रहा था, उसमें इन 5 महीनों का गैप सामान्य स्थिति के बाद भरने की आश में उद्यमियों की निगाहें हैं। परंतु अब कपड़ा व्यापार में कई परिवर्तन देखने को मिलेंगे जिसमें हल्के मालों की डिमांड कम होती दिख रही है। केवल कुछ प्लेयर, जिनकी क्वालिटी मालों में महारत होगी वो अपने व्यापार में बेहतर कार्य करेंगे।

परिवर्तन के इस दौर में बाजार खराब करने वाले कई एजेंट भी बाहर हो जाएंगे। विशेष प्रभाव यह भी होगा कि अब मंडी में हल्के कपड़े का निर्माण कम होता जाएगा, जिसमें विभिन्न नामी गिरामी ब्रांड की मिलते-जुलते नामों से कपड़ा बनाकर सेल कर रहे हैं उनको काफी कठिनाई आएगी। मिक्स मैच पैकिंग में बहुत ही हल्का कपड़ा जो सप्लाई होता है उसकी तो डिमाण्ड शून्य पर आ पहुंची है क्योंकि त्यौहारी एवं लगन इत्यादि सभी सीमित दायरे में होने से खपत नहीं के बराबर हो चुकी है। पिछले पखवाड़े में वीविंग में शर्टिंग के प्रोग्राम चल रहे थे, वो अन्तिम दौर में है लेकिन कुछ पूछ परख दिसावरी मण्डियों से होने लगी है जिसमें जो सूटिंग फैब्रिक 16 कलर शेड जैसे 2/18 SNZ टू बाई टू प्रिण्टेड, टू बाई टू ट्विल इत्यादि शामिल है। गौरतलब है कि इन फैब्रिक की प्लानिंग दो तीन महिने पूर्व करनी पड़ती है।

 

सिद्धार्थ एजेन्सी के एमडी श्री सिद्धार्थ श्रीमाल के अनुसार पिछले कई महिनों से घरेलू बाजार में डिमाण्ड तो बहुत ही कम हो गई है। भीलवाड़ा से यूनिफॉर्म फैब्रिक का कपड़ा बड़ी तादाद में आपूर्ति किया जाता है जिसमें 90 प्रतिशत स्कूली यूनिफॉर्म का सेल होता है जो फिलहाल स्कूलें खुलने के इंतजार में है। कुल मिलाकर इस वर्ष का यह सीजन खतम सा  हो गया है, शादी समारोह का दायरा भी सीमित हो चुका है। इसमें फैंसी एवं अन्य फैब्रिक में डिमाण्ड बन्द हो गई है जिसमें कपड़ा मण्डियां 20 प्रतिशत तक सिमट गई है। निर्यात बाजार में पहले के ऑर्डर लगभग होने में है। बाहरी देश भी पूरी तरह नहीं खुले हैं, उसमें भी बहुत पेमेण्ट अटका हुआ है, जिसमें भी व्यापारी हिचकिचा रहे हैं। अफ्रीका जैसे देशों में भीलवाड़ा का सस्ता कपड़ा सप्लाई होता है जो चेरिटीज एवं यूएनओ के माध्यम से आपूर्ति होता है, वो भी फिलहाल डिमाण्ड में नहीं है।फिलहाल सभी वैक्सीन बनने के इंतजार में है एवं इस बार दिवाली लेट होने से शायद तब तक कुछ परिवर्तन आये, जिससे व्यापार पटरी पर चलने लगेगा।

 

शिव एजेन्सी- प्रमुख यार्न सप्लायर श्री सुनील अग्रवाल ने बताया कि सूटिंग की डिस्पेच तो काफी कमजोर है। कुछ निर्यात ऑर्डर थे, वे भी अन्तिम दौर में है। दिवाली तक बाजार सुधरने की उम्मीद है क्योंकि डोमेस्टिक में यूनिफॉर्म एवं फैंसी दोनों में डिमाण्ड निकलती है तो कार्य शुरू हो सकेगा।

श्री भरका सिंथेटिक्स कंपनी के एम डी श्री पुनीत कोठारी ने बाजार में वर्तमान हालात पर कहा कि घरेलू बाजार तो ठप्प सा हो गया है, जो सर्वविदित है। बाकी निर्यात क्षेत्र में जो डिमाण्ड है उससे लूम्स चल रहे हैं।

 

एस आर एस प्रोसेस के टेक्निकल चीफ श्री गिरीश कांकरिया ने बताया कि अभी हालात बेहतर नहीं है। कार्य 50 प्रतिशत तक ही हो रहा है। यूनिफॉर्म अभी ठहरा हुआ है। कुछ यूपी के ऑर्डर आए थे, उनमें ऑक्सीजन का कार्य हुआ। इधर थोड़ी राहत एक्सपोर्ट एवं कॉटन सेक्टर में कार्य होने से मिली हुई है। सबसे बड़ी समस्या पेमेण्ट की आवक नहीं होने से खर्चे की मेन्टेनेन्स में कठिनाई आ रही है।

 

बेनीकोट ब्राण्ड के ऑनर श्री बीजी झंवर बताते हैं कि लॉकडाउन के दौरान जो कपड़ा उत्पादन ठप हुआ था उसका गैप आगे भरने की उम्मीद है परन्तु अब भीलवाड़ा बाजार फिल्टर हो रहा है जिसमें सूटिंग सेगमेण्ट में जो घर क्वालिटी विशेष में स्थान रखते हैं, वो खरीदी का केन्द्र बनेंगे।

 

प्रतिष्ठित यूनिफॉर्म निर्माता कम्पनी विकास सिन्टेक्स प्रा.लि. के डायरेक्टर श्री रवि कालरा ने बताया की यूनिफॉर्म सेक्टर में ग्राहकी बिल्कूल कम है मार्केट में पैमेण्ट की आवक न के बराबर है। फिलहाल भीलवाड़ा मार्केट के अन्तर्गत बाहरी मण्डियों से आए शर्टिंग, दुपट्टा के जॉब पर टिकी है काफी निर्माता शर्टिंग फैब्रिक का जॉब कर अपने मजदूरों का पेट भर रहे है।

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