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टेक्निकल टेक्सटाइल में निवेश बढऩे की संभावना

टेक्निकल टेक्सटाइल में निवेश बढऩे की संभावना

By: Textile World Date: 2020-08-25

मुंबई/ रमाशंकर पाण्डेय

कोरोना के भय सहित अनेक कारणों से कपड़ा बाजार में अभी व्यापारियों, दलालों, कामगारों, गुमास्ताओं और ग्राहकों का आवागमन कम है। बाजार को खोलने की छूट मिलने के बाद चहल-पहल बढ़ने की जो उम्मीद की गई थी, वह अभी तक फलीभूत नहीं है। इसमें सबसे बड़ा रोड़ा कोरोना केस पर नियंत्रण नहीं होने के साथ लोकल ट्रेन नहीं चालू करना रहा है। लोकल ट्रेन चालू होने की कोई संभावना दूर-दूर तक नहीं दिखाई दे रही है। यदि ऐसी ही स्थिति बनी रही, तो कपड़ा बाजार में सामान्य कामकाज संभव नहीं है। न तो बाजार में व्यापारियों की उपस्थिति बढ़ेगी और न ही ग्राहक बाजारों में आसानी से आ सकेंगे। अभी बाजारों में दुकानें बहुत कम संख्या में खुल रही है। रिटेल में त्योहारों की छिटपुट ग्राहकी है। करीब 50 प्रतिशत गारमेंट इकाईयों में काम शुरू हो गया है।

 

टेक्निकल टेक्सटाइल क्षेत्र में अच्छे संयोग बने हैं। रक्षा मंत्रालय ने जिन 101 वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाया है, उसमें बुलेट प्रुफ  जेकेट का आयात भी शामिल है। इस जैकेट को बनाने में टेक्निकल ग्रेड के कपड़ों का उपयोग किया जाता है। इस कारण अब टेक्निकल टेक्सटाइल के क्षेत्र में संसाधन की संभावना बढऩे के साथ बुलेट प्रुफ  जेकेट बनाने के लिए निजि क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, ऐसा उद्योग सूत्रों का अनुमान है। सरकार ने बुलेट प्रुफ  जेकेट के लिए 15 कंपनियों को लाइसेंस दिए हैं। भारत में प्रति वर्ष दस लाख जेकेट उत्पादन करने की क्षमता है। इतना ही नहीं, करीब 18 देशों में इसका निर्यात भी किया जाता है। सरकार के इस कदम से अब इस क्षेत्र में निवेश बढऩे के साथ उत्पादन अधिक से अधिक होने पर निर्यात अधिक बढऩे की संभावना से क्षेत्र का माहौल सुर्ख हो गया है।  वीविंग तथा प्रोसेसिंग स्तर पर अभी स्थितियां सामान्य नहीं हैं। लॉकडाउन के कारण पूर्व के कई त्यौहारी ग्राहकी फेल जाने के बाद अब पूजा, दशहरा और दीपावली जैसे त्यौहारों की ओर सभी की निगाहें लगी हुई है। भिवंडी में जहां उत्पादन आधे से कम उतर रहा है और लूमों पर कारीगरों की भारी कमी है, तो यहां बनती रेमंड कॉटन की मांग निकलनी शुरू हो गई है। यह कपड़ा ब्लाउज बनाने के काम आता है, तो वहीं मलमल एवं कॉटन साटीन में भी हलचल दिखाई दी है। इचलकरंजी में 60 प्रतिशत लूमों पर उत्पादन होने लगा है। लूमों पर स्थानीय कारीगरों के काम करने से श्रमिकों की बहुत दिक्कत नहीं है। केम्ब्रिक की अच्छी मांग को देखते हुए जिन लूमों पर पहले कॉटन धोती का उत्पादन होता था, वहां अब केम्ब्रिक का उत्पादन हो रहा है। धोती की मांग बिल्कुल नहीं है।

 

प्रोसेस हाउसों को भी कोरोना के कारण भारी झटका लगा है। प्रोसेस हाउस अभी इससे उबर नहीं सके है। यह स्थिति उन सभी स्थानों की है, जहां प्रोसेस हाउस हैं। कपड़ों की मांग नहीं है, श्रमिकों की भारी किल्लत के कारण प्रोसेस हाउसों में कामकाज सुचारू ढंग से नहीं हो सका है। इचलकरंजी में प्रोसेस हाउस सप्ताह में दो से तीन दिन ही काम कर पा रहे हैं। अहमदाबाद में जहां रोज लाखों मीटर कपड़ा प्रोसेस होता था और यह कपड़ा गारमेंट क्षेत्र तथा अन्य में खपा करता था, ऐसे बड़े छोटे सभी प्रोसेस हाउसों का बिजनेस घटकर 15 से 20 प्रतिशत रह गया है।

 

ये इकाईयां कपड़ों का निर्यात भी करती थी किन्तु हाल में स्थिति पलट गई है। देश में कपड़ों की मांग नहीं बढ़ी है, अधिक बारिश के कारण बाढ़ की समस्या है, इसके बावजूद सितम्बर अंत तक कामकाज सुचारू हो जाएगा।  फिलहाल कपड़ा बाजारों में सूटिंग और शर्टिंग की कोई मांग नजर नहीं आ रही है, लेकिन कॉटन केम्ब्रिक तथा रेयॉन जैसी आइटमों की मांग बढऩी शुरू हो गई है। कैम्ब्रिक एवं रेयॉन की सबसे  अधिक मांग पंजाब तथा हरियाणा की है, इससे ड्रेस मटीरियल और कुर्ती बनती है। कोरोना के कारण महाराष्ट्र और दक्षिण भारत की मण्डियों में प्रमाणिक तौर पर कामकाज नहीं हो रहा है, क्योंकि इन क्षेत्रों में अभी लॉकडाउन की बंदिशें हैं। महामारी की स्थितियां धीरे-धीरे हल्की हो रही है। व्यापारियों को अब स्थितियों में सुधार की उम्मीद है। लोग सतर्क हैं। जैसे ही सूटिंग, शर्टिंग, साड़ी इत्यादि में कारोबार खुलने लगेगा और बाजारों तक ग्राहकों की पहुंच आसान होगी, बाजार करवट लेगा। नवरात्रि से बाजार में अच्छे कारोबार होने तथा निरंतर सुधार होने की उम्मीद है।

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