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रुई उत्पादन साढ़े पांच लाख गांठ बढक़र कुल 335.50 लाख गांठ

रुई उत्पादन साढ़े पांच लाख गांठ बढक़र कुल 335.50 लाख गांठ

By: Textile World Date: 2020-08-18

मुंबई/ रमाशंकर पाण्डेय

रुई बाजार नरम है। मांग साधारण है। हल्की गुणवत्ता की आवक अधिक होने से बाजार पर दबाव है। कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ  इंडिया के पास भरपूर स्टॉक होने से इसने 15 जून से बिक्री शुरू की थी, परंतु ज्यादा स्टॉक नहीं निकला है। सीसीआई ने क्वांटिटी डिस्काउंट भी ऑफ र की है। दरअसल हाजिर में रुई के भाव सीसीआई के भाव की तुलना में कम हंै। दूसरे स्पिनिंग मिलें खरीदी करने के लिए आगे नहीं आ रही है, कारण कि उनके पास तैयार कॉटन यार्न का भरपूर स्टॉक होने से यार्न उत्पादन सीमित रखा है। निर्यात बाजारों में बांग्लादेश और वियतनाम ही अच्छे हैं, अन्य की मांग बहुत  कमजोर है। लॉकडाउन के दौरान भी सरकारी एजेंसियों ने किसानों के हित में न्यूनतम समर्थन भाव पर कपास की खरीदी जारी रखी है। उत्पादन अनुमान 5.5 लाख गांठ बढक़र 335.50 लाख गांठ है।

 

सीसीआई का मई 2020 में उत्पादन अनुमान 330 लाख गांठ था, जो पिछले वर्ष के 312 लाख गांठ की तुलना में 23.50 लाख गांठ अधिक था। स्पिनिंग मिलों का कामकाज बंद रहने और अभी धीमी गति से शुरू होने रुई की स्थानीय खपत का अनुमान 331 लाख गांठ से घटाकर 280 लाख गांठ किया था। सीसीआई के अनुसार सितम्बर 20 अंत में रुई का स्टॉक बढक़र 55.50 लाख गांठ रहेगा। मई 20 का अनुसार 50 लाख गांठ था। सीसीआई की फसल समिति की करीब 30 सदस्यों की एक बैठक अगस्त अंत तक होने जा रही है, जिसमें 2019-20 की रुई की आवक एवं जावक की एक सटीक निचोड़ की रूपरेखा तैयार की जाएगी, तथापि चालू सीजन में उत्पादन में जो साढ़े पांच लाख गांठ की बढ़त है, उसमें हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, आंध्र, कर्नाटक का योगदान है।

दूसरी ओर सीसीआई का अनुमान है कि जून अंत तक अपेक्षित उत्पादन का करीब 97.50 प्रतिशत अर्थात् 327 लाख गांठ की आवक हो चुकी है। इस आवक में नॉर्थ जोन की 59 लाख गांठ, सेंट्रल जोन में गुजरात में 80, महाराष्ट्र में 80, मध्यप्रदेश में 16 को मिलाकर कुल 176 लाख गांठ, साउथ जोन में तेलंगाना में 51, आंध्रप्रदेश में 14, कर्नाटक में 18.50 और तमिलनाडु में 3.50 को मिलाकर कुल 87 लाख गांठ। इसके अलावा उड़ीसा और अन्य राज्यों के कुल 4.75 लाख गांठ की आवक शामिल हैं, लेकिन व्यापारियों के अनुमान तथा आवक दोनों इससे भिन्न रहे हैं। विश्व बाजार में भारतीय रुई सस्ती होने से रुई का निर्यात 47 लाख गांठ और आयात 15 लाख गांठ रहने की धारणा है। पिछले वर्ष 2018-19 में रुई का निर्यात 42 लाख गांठ और आयात 32 लाख गांठ रहने का अनुमान लगाया गया था।

 

आगामी 2020-21 की सीजन में कपास बुवाई के मिल रहे आंकड़ों के अनुसार अब तक 104.8 लाख हेक्टेयर में कपास की बुवाई की जा चुकी है। आमतौर पर कपास की बुवाई का सामान्य क्षेत्रफल 120 से 122 लाख हेक्टेयर रहा करता है। इस बार यह क्षेत्रफल बढ़ा है। गुजरात जो देश में कपास उत्पादन में सबसे आगे है, यहां 80 प्रतिशत कपास की बुवाई हो चुकी है। पिछले वर्ष के 22.50 लाख हेक्टेयर के सामने इस बार 21.47 लाख हेक्टेयर में कपास बोया गया है, जबकि यहां कपास करीब 26.73 लाख हेक्टेयर में उगाया जाता रहा है। इससे प्रतीत होता है कि गुजरात में इस बार किसानों ने कपास के बदले में अन्य फसलों को तरजीह दी है। सौराष्ट्र में सबसे अधिक 15.21 लाख हेक्टेयर में कपास उगाया गया है। सौराष्ट्र में अमरेली जिला सबसे आगे है, उसके बाद सुरेंद्र नगर आता है।

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