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अनेक आयातक कॉटन सौदों से मुकरे

अनेक आयातक कॉटन सौदों से मुकरे

By: Textile World Date: 2020-08-10

नई दिल्ली/ राजेश शर्मा

कॉटन व्यापार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कोविड-19 के कारण उत्पन्न हुए हालातों में अनेक आयातक अमेरिका और कुछ अन्य देशों के साथ हुए सौदों से मुकर गए हैं, इसमें सबसे अधिक आयातक चीन के हैं। उल्लेखनीय है कि चीन विश्व का सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है तथा अपनी खपत के एक बड़े भाग को आयात से पूरा करता है। चीन टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट का सबसे बड़ा निर्यातक देश भी है और गत कुछ महिनों में फैली कोविड-19 महामारी के कारण वहां से निर्यात में भारी गिरावट आई है, इससे वहां की मिलों में उत्पादन कम हो गया है।

 

कोविड महामारी के कारण मिलों मांग कमजोर होने से आइसीइ में कॉटन के भाव में एक समय 25 प्रतिशत तक की गिरावट आ गई थी, पर विगत दिनों भाव में कुछ सुधार हुआ है फिर भी जनवरी की तुलना में भाव में लगभग 11 प्रतिशत की कमी है। अप्रैल में कॉटन के भाव गिर कर लगभग 10 वर्ष के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। सूत्रों के अनुसार जहां एक ओर कॉटन के भाव में गिरावट आई है, वहीं दूसरी ओर फैब्रिक और रेडीमेड गारमेंट के ऑर्डर भी नहीं आ रहे हैं, इससे चीन की अनेक कॉटन मिलों ने पुराने रेट पर किए सौदों से मुकरना आरंभ कर दिया है।

 

वल्र्ड कॉटन एक्सपोट्र्स एसोसिएशन और अमेरिकन कॉटन एक्सपोट्र्स एसोसिएशन के सूत्रों के अनुसार उनके पास कॉटन के सौदों को लेने से मुकरने जो मामले आए हैं उनमें से लगभग 50 प्रतिशत चीन की मिलों के हैं। अमेरिका के अतिरिक्त भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश की मिलों द्वारा कॉटन के आयात सौदों से मुकरने की भी रिपोर्ट है। सूत्र बताते हैं कि चीन सरकार द्वारा अपने बफ र स्टॉक से कॉटन बेचे जाने से भी आयातक कॉटन का आयात नहीं कर रहे हैं, क्योंकि सरकार द्वारा बेची जा रही कॉटन आयातित कॉटन से सस्ती मिल रही है। ब्राजीलियन भी परेशान... ब्राजील के कॉटन निर्यातक भी आयातकों के सौदों से मुकरने से परेशान हैं। बताया जाता है कि चीन की मिलें अब ब्राजील से भी कॉटन नहीं उठा रही है, हालांकि वहां पर भाव कुछ सस्ते हैं।

वल्र्ड कॉटन एक्सपोट्र्स एसोसिएशन और अमेरिकन कॉटन एक्सपोट्र्स एसोसिएशन के सूत्रों के अनुसार उनके पास कॉटन के सौदों को लेने से मुकरने जो मामले आए हैं उनमें से लगभग 50 प्रतिशत चीन की मिलों के हैं। अमेरिका के अतिरिक्त भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश की मिलों द्वारा कॉटन के आयात सौदों से मुकरने की भी रिपोर्ट है। सूत्र बताते हैं कि चीन सरकार द्वारा अपने बफर स्टॉक से कॉटन बेचे जाने से भी आयातक कॉटन का आयात नहीं कर रहे हैं, क्योंकि सरकार द्वारा बेची जा रही कॉटन आयातित कॉटन से सस्ती मिल रही है।

 

ब्राजीलियन भी परेशान-ब्राजील के कॉटन निर्यातक भी आयातकों के सौदों से मुकरने से परेशान हैं। बताया जाता है कि चीन की मिलें अब ब्राजील से भी कॉटन नहीं उठा रही है, हालांकि वहां पर भाव कुछ सस्ते हैं।

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