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कोरोना वायरस की गिरफ्त में समूचा कपड़ा बाजार

कोरोना वायरस की गिरफ्त में समूचा कपड़ा बाजार

By: Textile World Date: 2020-07-25

अहमदाबाद/ सांवलाराम चौधरी

पिछले काफी समय से कोरोना ने हर इंसान व व्यापार को अपनी बेड़ियों में जकड़ रखा है। अब तो यह हाल है कि रोज 40 से 50 हजार पॉजिटिव केस आने लगे हैं। अगर इसकी रफ्तार ऐसी ही बढ़ती रही तो थोड़े समय में ही प्रतिदिन एक लाख का आंकड़ा छूने में देरी नहीं लगेगी। काफी राज्यों ने अपने अपने हिसाब से लॉकडाउन लागू किया है। अब तो स्थिति ऐसी आ गई है की कम्युनिटी स्प्रेड यानी वायरस अटेक की स्टेज 3 आने वाली है, जो बहुत खतरनाक होती है, जिसमें सं मण के स्रोत का पता लगा पाना भी नामुमकिन हो जाता है। इस प्रकार की स्थितियों के उत्पन्न होने पर कम से कम 15 दिन या 21 दिन का लोकडाउन करवाना जरूरी हो जाता है और लगता है कि आने वाला समय कोरोना से बचने अथवा इसके साथ साथ जीने का ही समय होगा। भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व को कोरोना ने अपने आगोश में ले रखा है, जिससे हर प्रकार के व्यापार प्रभावित हो रहे हैं व बहुत से बेरोजगारी की चपेट में आ गये हैं।

सरकार द्वारा पेट्रोलियम उत्पादों में वृद्धि के कारण महंगाई बढ़ने का खतरा बना हुआ है। यान के भाव बढ़ने से ग्रे बाजार में काफी तेजी बताई जा रही है। भिवंडी, मालेगांव, ईरोड़, इचलकरंजी व भीलवाड़ा आदि सेन्टरों में यार्न का उत्पादन कम होने से भाव बढ़ रहे हैं। यार्न के भाव बढ़ने से ग्रे में लगातार तेजी बनी हुई है। कॉटन व रेयोन में अच्छी मांग है। कॉटन प्रिंट, कैब्रिक प्रिंट 44," रेयोन प्लेन 44" व रेयोन, प्रिंट 58" में अच्छी ग्राहकी चल रही है। सभी व्यापारियों को अच्छी बारिश की आशा है मगर अभी भी बारिश कम हो रही है, अच्छी वर्षा होने से व्यापार में तेजी आएगी। अभी सभी व्यापारिक केंद्रों से पेमेंट की आवक काफी कमजोर है। ग्राहकी में प्लेन व प्रिंट माल की डिमांड ज्यादा है। साउथ के काफी सेंटर आंशिक लॉकडाउन में चल रहे हैं। महाराष्ट्र में भी कोरोना से खासकर मुंबई बहुत प्रभावित है, इससे वहां के रिटेल व्यापार को धक्का लगा है। पूरे भारत में जब तक रिटेल व्यापार अच्छा नहीं चलेगा, तब तक पूरी चैनल खाली रहेगी। आगे काफी त्यौहार भी आ रहे हैं मगर जिस प्रकार का माहौल है, उससे नहीं लग रहा है कि आगे अच्छा कारोबार होगा। जब तक कोरोना की दवाई नहीं आती है, तब तक सभी लोगों को डर के साए में ही जीना है। कई देश कोरोना की दवा बनाने का दावा कर रहे हैं, मगर जब तक बाजार में आम नागरिक को नहीं मिलेगी और आम जनता उससे अच्छी नहीं होगी तब तक इसी माहौल में जीना है।

 

भारत कोरोना की दवाई 15 अगस्त से बाजार में उतारने की बात कह रहा है, मगर धरातल पर आने के बिना विश्वास नहीं किया जा सकता। अहमदाबाद के लगभग अच्छे प्रोसेस हाउस में काम की कोई कमी नहीं है। सूरत में काम कम होने से अहमदाबाद के प्रोसेस हाउस अपनी पूरी ताकत से 24 घंटे चालू हैं तथा अगले 30 दिनों तक का ग्रे उनके पास पड़ा है, व प्रोग्राम भी मिल रहे है। सबसे ज्यादा खराब हालत रेडीमेड गारमेंट की बताई जा रही है। जीस व शर्ट का बाजार बहुत ही ज्यादा परेशानी से गुजर रहा है। पहले ही उनके पेमेंट का धारा 6 महीने में होता था, अब व्यापारी कोरोना के कारण बहाने बना रहे हैं। पेमेंट की आवक नहीं होने से व्यापारी नया माल नहीं बना रहे हैं। सभी प्रकार के कपड़े में अब व्यापारी सिर्फ और सिर्फ पुराना पेमेंट वसूलने में लगे हैं। अब सिर्फ अच्छे व्यापारियों को ही माल मिल रहा है, जो समय पर पेमेंट कर रहे हैं। उधर इरोड़ के ग्रे में एडवांस पेमेंट का सिस्टम ज्यादा हो गया है। पेमेंट देने के 10 से 12 दिन ग्रे आ रहा है, इससे छोटे व्यापारी बाजार से गायब हो जाएंगे। गुजरात में कपास का उत्पादन अच्छा होने से कपास के दाम लगातार दबाव में चल रहे हैं। बाजार में एक से दो पार्टी ढीली पड़ने की अफवाह जोरों पर है। वस्त्र मंत्रालय को छोटे व्यापारियों को राहत देनी चाहिए

 

काफी समय पहले दिल्ली वालों के पैसे अहमदाबाद की दो पार्टियों ने नहीं दिये व गायब हो गए थे, उनकी गिरफ्तारी भी कर ली गई है। उनका आंकड़ा भी 8 से 10 करोड़ के आसपास बताया जा रहा है। सरकार द्वारा कपड़ा बाजार के लिए कोई बड़ा राहत का ऐलान करना चाहिए क्योंकि सरकार की जो भी राहत होती है, वह सिर्फ बढ़े व्यापारियों तक ही सीमित रहती है, ऐसे में छोटे व्यापारी अब काफी परेशानी से गुजर रहे हैं। भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय को इसकी ओर ध्यान देना बेहद जरूरी है। जिस प्रकार छोटे किसानों को राहत दी जाती है, उसी प्रकार छोटे व्यापारियों को भी कुछ ना कुछ राहत देनी चाहिए। अच्छी बरसात, अच्छी ग्राहकी, अच्छा पेमेंट व कोरोना में रिकवरी ही अब सभी व्यापारियों व देशवासियों की अपेक्षा है।

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