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यार्न इकाइयों की मांग घटने से रुई के भाव में भारी गिरावट

यार्न इकाइयों की मांग घटने से रुई के भाव में भारी गिरावट

By: Textile World Date: 2020-07-25

मुम्बई/ हाजिर बाजार में रुई की मांग लगातार घट रही है। निर्यात बाजार भी सुस्त है। मांग सुधरने पर भी हाजिर एवं वायदा में भाव सुधरने की संभावना रहती है, जो हाल ऐसी स्थिति बिल्कुल नहीं दिखाई दे रही है, उल्टे बाजार में कपास की आवक जारी है। किसानों के पास भरपूर माल होने की जानकारी मिल रही है। हाजिर बाजार में मांग के अभाव में रुई के भाव करीब 20 प्रतिशत तक नीचे उतर चुके है। स्पिनिंग इकाईयों की मांग कमजोर है। पुरानी रुई का स्टॉक होने और कॉटन यार्न के उत्पादन को सीमित करने के कारण यार्न बनाने वाली इकाईयों की रुई की मांग घटी है। बाजार में यार्न की जब तक यथोचित मांग नहीं निकलती है, रुई के भाव दबाव में रहेंगे। देश में कपास की बुवाई की जो रिपोर्ट मिली है, तद्नुसार अब तक के आंकड़े पिछले साल की तुलना में करीब दोगुना के हैं। करीब 92 लाख हेक्टेयर में अब तक कपास की बुवाई हो चुकी है, जबकि पिछले साल 46 लाख हेक्टेयर था। 2020-21 के मौसम में कपास की खेती 115 से 120 लाख हेक्टेयर को पार कर जाने की संभावना है। देश में गुजरात कपास उत्पादन में सबसे अग्रणी राज्य माना जाता है, यहां कपास का क्षेत्रफल बढ़ा है, परंतु कहीं-कहीं किसान ने मूंगफ ली जैसे दूसरी फसल की ओर रुख किया है, क्योंकि उनको चालू सीजन में उनकी उपज का भाव नहीं मिला है। इस बीच रुई का समर्थन भाव प्रति क्विंटल 5515 रू और लॉग स्टेपल का 5825 रू किया गया है। व्यापरियों का ऐसा कहना है कि स्थानीय तथा निर्यात बाजारों में कॉटन यार्न की मांग नहीं बढऩे से हाजिर बाजार में रुई की मांग पर विपरीत असर पड़ा है। गुजरात में कॉटन सीजन का मुख्य समय अक्टूबर से जून तक चलता है, लेकिन अभी भी बाजारों में कपास की आवक जोरदार है। दूसरी ओर राज्य में सीसीआई की खरीदी बंद होने से भी अधिक दबाव बना है। अभी तक कुल अनुमानित 330 लाख गांठ में से अधिक से अधिक माल बाजार में आ चुका है। यह स्थिति गुजरात में भिन्न है, यहां अभी भी कपास की आवक जारी है और किसानों को उचित भाव नहीं मिल रहे है। किसानों के पास स्टॉक है, जो खुले बाजार से अच्छा भाव पाने की चाहत रखते हैं।

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