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घरेलू मांग नहीं होने से सूटिंग उत्पादन का ग्राफ गिरा नये अवसर के रूप में शर्टिंग उत्पादन दे सकता है राहत

घरेलू मांग नहीं होने से सूटिंग उत्पादन का ग्राफ गिरा नये अवसर के रूप में शर्टिंग उत्पादन दे सकता है राहत

By: Textile World Date: 2020-07-15

भीलवाड़ा/ कमलेश व्यास

लॉकडाउन होने के दौरान कई प्रवासी मजदूर अपने अपने गृह राज्य में पलायन हो चुके थे, जो अब धीरे धीरे पुन: लौट रहे हैं। गौरतलब है कि स्थानीय मंडी में अधिकांश प्रवासी मजदूर बिहार, यूपी एवं उड़ीसा राज्य के निवासी हैं। स्थानीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री संकट के दौर से गुजर रही है, क्योंकि डोमेस्टिक में फैंसी कपड़ों की डिमांड नहीं है। इधर यूनिफॉर्म का कपड़ा भी मंद गति में आ पहुंचा, क्योंकि शिक्षा संस्थान खुलने में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

सूत्रों के हवाले से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुंबई मंडी अस्त व्यस्त होने के कारण वहां की शर्टिंग स्थानीय मंडी में बनने लगी है तथा कई कंपनियों ने यहाँ जॉब वर्क दिया है। यह फैब्रिक रेपियर के अलावा सल्जर-एयर जेट लूम पर भी बन रही है।

निर्यात बाजार के ऑर्डर मिलने से उद्यमियों को थोड़ी राहत है। इसमें श्रीलंका, दुबई, नेपाल एवं अफगानिस्तान से ऑर्डर मिले हैं, जिसमें सूटिंग के साथ शर्टिंग भी शामिल है।

कुछ बदलाव कपड़ा उत्पादन में कोरोना वायरस के बचाव के लिये एण्टीवायरस (एंटीबैक्टीरियल) फैब्रिक भी बनने लगी है तथा इसका उपयोग यहां पर बनने वाली एसेसरी में किया जाकर उम्दा क्वालिटी के मास्क का निर्माण भी किया जा रहा है।

ए. के. प्रोसेस में टेक्निकल चीफ श्री अरूण सिंह के अनुसार फिलहाल थोड़ा बहुत एक्सपोर्ट के सहारे कार्य चल रहा है। कई बड़ी मण्डियाँ बन्द होने से कपड़े की डिमाण्ड में काफी कमी आई है। यूनिफॉर्म की डिमाण्ड भी कम होने लगी है एवं प्रोसेस गृहों में कपड़े की स्टॉक बढ़ता जा रहा है, इससे पेमेण्ट का फ्लो, रुक गया है।

मंगलम यार्न के प्रबन्धक श्री सन्दीप बागड़ोदिया का कहना है कि डोमेस्टिक बाजार में डिमाण्ड नहीं है, लेकिन एक्सपोर्ट ठीक चलने से थोड़ा बहुत कार्य हो रहा है। कॉटन सेक्टर की सप्लाई फैब्रिक में गांधीनगर (दिल्ली) में उद्यमियों का काफी पैसा अटकने से पेमेण्ट की समस्या आ रही है। आगामी समय में एक से डेढ़ महिने स्थिति सुधरती नज़र नहीं आ रही है। इधर लगन इत्यादि के नियम कायदे क्या रहेंगे, इसकी वजह से व्यापारी आशंकित हैं।

मुरारका सूटिंग के डायरेक्टर- श्री महेश अग्रवाल ने बताया कि औसतन 50 प्रतिशत तक कार्य हो रहा है। क्योंकि जब तक सारी मण्डिया प्रोपर नहीं खुलती तब तक डिमाण्ड आना संभव नहीं है। इसके चलते होलसेलर्स एवं रिटेलर्स रूची नहीं ले रहे है। परंतु मण्डी के लिये शर्टिंग उत्पादन के लिये ऑर्डर मिलना लाभदायक है इसी क्रम में हमारी कम्पनी भी शर्टिंग उत्पादन कर रही है। ऐसा लगता है कि भीलवाड़ा के लिये आगे अच्छे अवसर मिलेंगे अगस्त के महिने में सुधार के आसार है।

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