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गारमेण्ट निर्यात में 30-35 प्रतिशत कमी की आशंका

गारमेण्ट निर्यात में 30-35 प्रतिशत कमी की आशंका

By: Textile World Date: 2020-07-15

नई दिल्ली / राजेश शर्मा

कोरोना वायरस के कारण भारतीय गारमेण्ट के प्रमुख खरीददारों-अमेरिका और यूरोप में पैदा हुए संकट के कारण  देश 2020-21 के दौरान रेडीमेड गारमेंट के निर्यात में 30 से 35 प्रतिशत तक की गिरावट आने की आशंका है। यही नहीं, घरेलू गारमेंट बाजार में भी कारोबार में गिरावट आने की संभावना है। यह कहना है कि है क्रिसिल रिसर्च नामक रेटिंग एजेंसी का।

एजेंसी ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत से कुल गारमेंट निर्यात में से लगभग 64 प्रतिशत का निर्यात केवल अमेरिका और यूरोप को किया जाता है, लेकिन कोविड-19 से दोनों देश बुरी तरह प्रभावित हैं और इससे निर्यात में कमी आएगी। इसका कहना है कि महामारी के कारण लागू किए गए लॉकडाउन से वहां पर अनेक रिटेलरों ने कारोबार बंद कर दिया है। इसके अतिरिक्त लॉकडाउन के कारण वहां पर उत्पन्न हुई बेरोजगारी के कारण लोगों की आय में गिरावट आई है और उन्होंने कपड़ों पर होने वाले खर्च में कमी कर दी है। इसका मानना है कि मार्च तिमाही में भारत से रेडीमेड गारमेंट के निर्यात में लगभग 16 प्रतिशत की कमी आई थी, जबकि अप्रैल में इसमें 91 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत से रेडीमेड गारमेंट के निर्यात में 30 से 35 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। रिपोर्ट के अनुसार जनवरी-मार्च तिमाही में भारत से का कुल निर्यात लगभग 13 प्रतिशत कम हुआ था, जबकि अप्रैल में इसमें 60 प्रतिशत की गिरावट आई क्योंकि लॉकडाउन के कारण न केवल देश में परिवहन प्रभाावित रहा अपितु वैश्विक स्तर पर भी कारोबार प्रभावित हुआ, क्योंकि अनेक देशों में लॉकडाउन चल रहा था। क्रिसिल की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि भारत से टेक्सटाइल और कॉटन यार्न का निर्यात कोरोना वायरस महामारी से पहले ही प्रभावित था।

क्योंकि विश्व बाजार में वियतनाम और चीन से कड़ी प्रतिस्पर्धा है और चीन विश्व बाजार में अपना स्टॉक निकाल रहा था। इसके अलावा कुछ देशों के साथ मुक्त व्यापार संधि नहीं होने से भारत से भी निर्यात प्रभावित हो रहा था। रिपोर्ट के अनुसार मार्च तिमाही में भारत से कॉटन यार्न निर्यात प्रभावित हुआ क्योंकि चीन की मांग कमजोर थी। चीन से फैब्रिक और गारमेंट का निर्यात प्रभावित होने से वहां से कॉटन यार्न की मांग कम आई। उल्लेखनीय है कि भारत के कुल कॉटन यार्न निर्यात का लगभग एक तिहाई केवल चीन को ही किया जाता है। इसके अतिरिक्त बांग्लादेश को भी कॉटन यार्न निर्यात में गिरावट आई। कुल निर्यात में से लगभग 20 प्रतिशत का निर्यात केवल बांग्लादेश को किया जाता है।

घरेलू बाजार- एजेंसी के अनुसार है कि देश की संगठित क्षेत्र के रिटेल सेक्टर की गारमेंट युनिटों का कारोबार भी कोविड से बुरी तरह प्रभाावित होने की आशंका है और चालू वर्ष कुल कारोबार 30 से 35 प्रतिशत तक गिर सकता है। गारमेंट में संगठित क्षेत्र की युनिटों का सालाना कारोबार लगभग 1.70 लाख करोड़ का है। इसके अतिरिक्त लॉकडाउन के कारण रिटेल स्टोरों के बंद होने, आवागमन सीमित होने और उपभोक्ताओं की आय प्रभावित होने से रिटेल में गारमेंट का कारोबार बुरी तरह प्रभावित होगा। इसका कथन है कि कम्पनियों के मुनाफे पर इससे कहीं अधिक असर पडऩे की आशंका है। इससे इन कम्पनियों का आगामी समय में अधिक पूंजी आवश्यकता होगी, ताकि वे नकदी की कमी को पूरा कर सकें। लॉकडाउन समाप्त होने के बाद दबी हुई मांग निकलने और उपभोक्ता के व्यवहार का कारोबार में रिकवरी पर असर होगा। क्रिसिल के अनुसार डिपार्टमेन्टल स्टोरों में गारमेंट की बिक्री से प्राप्त राजस्व में लगभग 40 प्रतिशत की कमी आ सकती है क्योंकि अधिकांश स्टोर, मॉल एक ही श्रेणी के शहरों में स्थित हैं। फैशन रिटेलरों के कारोबार पर असर कम होगा, क्योंकि उनकी उपस्थिति दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में अधिक है। इस प्रकार के रिटेल स्टोरों के अलग-थलग होने का इन्हें लाभ मिलेगा। उपभोक्ता की आय के स्तर का लाभ भी इसी श्रेणी के स्टोरों को मिलेगा। रिपोर्ट के अनुसार इस वित्त वर्ष में स्टोरों की ऑनलाइन सेल अधिक हो सकती है, क्योंकि महामारी के कारण आम जनता सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रही है। धन की तंगी होने के कारण रिटेलरों को ऋण का सहारा भी लेना पड़ सकता है। जिन स्टोरों के पास विभिन्न ब्रांड होंगे और पर्याप्त लिक्विडिटी होगी, उनको लाभ मिलेगा।

 क्योंकि विश्व बाजार में वियतनाम और चीन से कड़ी प्रतिस्पर्धा है और चीन विश्व बाजार में अपना स्टॉक निकाल रहा था। इसके अलावा कुछ देशों के साथ मुक्त व्यापार संधि नहीं होने से भारत से भी निर्यात प्रभावित हो रहा था।

रिपोर्ट के अनुसार मार्च तिमाही में भारत से कॉटन यार्न निर्यात प्रभावित हुआ क्योंकि चीन की मांग कमजोर थी। चीन से फैब्रिक और गारमेंट का निर्यात प्रभावित होने से वहां से कॉटन यार्न की मांग कम आई। उल्लेखनीय है कि भारत के कुल कॉटन यार्न निर्यात का लगभग एक तिहाई केवल चीन को ही किया जाता है। इसके अतिरिक्त बांग्लादेश को भी कॉटन यार्न निर्यात में गिरावट आई। कुल निर्यात में से लगभग 20 प्रतिशत का निर्यात केवल बांग्लादेश को किया जाता है।

घरेलू बाजार- एजेंसी के अनुसार है कि देश की संगठित क्षेत्र के रिटेल सेक्टर की गारमेंट युनिटों का कारोबार भी कोविड से बुरी तरह प्रभाावित होने की आशंका है और चालू वर्ष कुल कारोबार 30 से 35 प्रतिशत तक गिर सकता है। गारमेंट में संगठित क्षेत्र की युनिटों का सालाना कारोबार लगभग 1.70 लाख करोड़ का है।

इसके अतिरिक्त लॉकडाउन के कारण रिटेल स्टोरों के बंद होने, आवागमन सीमित होने और उपभोक्ताओं की आय प्रभावित होने से रिटेल में गारमेंट का कारोबार बुरी तरह प्रभावित होगा। इसका कथन है कि कम्पनियों के मुनाफे पर इससे कहीं अधिक असर पडऩे की आशंका है। इससे इन कम्पनियों का आगामी समय में अधिक पूंजी आवश्यकता होगी, ताकि वे नकदी की कमी को पूरा कर सकें। लॉकडाउन समाप्त होने के बाद दबी हुई मांग निकलने और उपभोक्ता के व्यवहार का कारोबार में रिकवरी पर असर होगा।

क्रिसिल के अनुसार डिपार्टमेन्टल स्टोरों में गारमेंट की बिक्री से प्राप्त राजस्व में लगभग 40 प्रतिशत की कमी आ सकती है क्योंकि अधिकांश स्टोर, मॉल एक ही श्रेणी के शहरों में स्थित हैं। फैशन रिटेलरों के कारोबार पर असर कम होगा, क्योंकि उनकी उपस्थिति दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में अधिक है। इस प्रकार के रिटेल स्टोरों के अलग-थलग होने का इन्हें लाभ मिलेगा। उपभोक्ता की आय के स्तर का लाभ भी इसी श्रेणी के स्टोरों को मिलेगा। रिपोर्ट के अनुसार इस वित्त वर्ष में स्टोरों की ऑनलाइन सेल अधिक हो सकती है, क्योंकि महामारी के कारण आम जनता सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रही है। धन की तंगी होने के कारण रिटेलरों को ऋण का सहारा भी लेना पड़ सकता है। जिन स्टोरों के पास विभिन्न ब्रांड होंगे और पर्याप्त लिक्विडिटी होगी, उनको लाभ मिलेगा।

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