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गारमेण्ट की मांग त्योहारी सीजन अक्टूबर से दिसम्बर में ही बढ़ेगी

गारमेण्ट की मांग त्योहारी सीजन अक्टूबर से दिसम्बर में ही बढ़ेगी

By: Textile World Date: 2020-07-10

मुम्बई/ रमाशंकर पाण्डेय
 गारमेण्ट की रिटेल मांग कम होने और मुंबई में कोरोना के बढ़ रहे मामलों से ग्राहकों का बाजार में उतरना कम हो रहा है। बहुत दिनों से घरों में कैद होने के बाद जब अनलॉक-1 में बाहर निकलने का मौका मिला, तब ग्राहकों ने सिर्फ  अति आवश्यक कपड़ों की खरीदी की है। अन्य किस्म के तैयार परिधानों की मांग अभी बाजार में कम है। एक तो लोगों के पास धन का अभाव है, दूसरे कोरोना का डर भी उनकों बाजार में जमकर खरीदी करने से रोक रहा है। रिटेलर्स के पास अधिकतर पुराना स्टॉक है और आकर्षक ऑफ र देकर अपना स्टॉक कम करने में जुट गए हंै। मॉनसून शुरू हो चुका है, इसमें धीरे-धीरे तेजी ही आने वाली है, इससे पुराने स्टॉक को निकाल देना ही उचित है। लॉकडाउन के नियम शिथिल करने के बाद जून में अधिकतर रिटेल स्टोर्स खुल गए हैं। महामारी शुरू होने के पहले जिस तरह की मांग थी, उस स्तर की मांग अक्टूबर से दिसम्बर के दौरान पहुंच सकती है, तब भारत में त्यौहारों का सीजन भी होता है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल का यह आकलन 60 कपड़ा रिटेलरों की राय पर आधारित है। सेक्टर के एक तिहाई राजस्व में इन 60 रिटेलर्स की हिस्सेदारी है। क्रिसिल के डायरेक्टर श्री गौतम शाही के अनुसार ग्राहकों को स्टोर्स की तरफ  खींचने के लिए रिटेलर्स को आकर्षक डिस्काउण्ट की पेशकश करने के अलावा सोशल डिस्टेसिंग के नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ेगी, इससे कर्मचारियों की छंटनी की भी संभवना है।  वित्तवर्ष 2019-20 में परिचालन लाभ 7 से 8 प्रतिशत की रेंज में था, जिसमें 2 प्रतिशत की कमी संभव है।

एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मौजूदा वित्तवर्ष में 1.7 लाख करोड़ रू के संगठित रिटेल एपेरल सेक्टर की कमाई में 30 प्रतिशत की कमी आ सकती है। इस सेक्टर की कंपनियों के मुनाफे पर प्रतिकूल असर पड़ेगा, क्योंकि परिचालन लाभप्रदता में 2 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है और इसके चलते कंपनियां कर्ज लेने पर विवश हो सकती है। महामारी की रोकथाम के लिए मार्च महीने में लॉकडाउन की शुरूआत की गई थी, जिसे अभी तक पूरी तरह से खत्म नहीं किया गया है। इस कारण देशभर में आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार सुस्त पड़ गई है।

उपभोक्ता मांग भी घटी है।  कारोबार मुश्किल से 15 से 20 प्रतिशत है। स्थितियां सुधरने में समय लगेगा। मुंबई के बाजारों तक ग्राहकों के पहुंचने का साधन भी नहीं है, लोकल सेवा अब 12 अगस्त तक नहीं चलने वाली है। छोटी दुकानों पर सेल लगा है। ज्यादातर दुकानों में पुराना माल है, जिसे दुकानदार सेल के जरिए निकाल रहे हैं। इनमें टीशर्ट, हाफ पैंट आदि ग्राहक खरीद रहे हैं। दूसरी ओर बांग्लादेश से भारत में साफ्टा करार के तहत शुल्क मुक्त और कोटा मुक्त गारमेण्ट आयात होता है, जिसमें कपड़ा चीन का होता है। देश में चीनी सामानों के प्रति बढ़ते आक्रोश के मद्देनजर सरकार ने कंट्री आफ ओरिजिन नियम को कडक़ बनाने की पहल की है।

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