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एशिया का सबसे बड़ा होलसेल रेडीमेड मार्केट गांधीनगर (दिल्ली) भयानक स्थिति की ओर

एशिया का सबसे बड़ा होलसेल रेडीमेड मार्केट गांधीनगर (दिल्ली) भयानक स्थिति की ओर

By: Textile World Date: 2020-07-08

दिल्ली/ जैसा कि सभी को ज्ञात है कि लॉकडाउन के लगभग 3 माह पश्चात् अभी भी व्यापार की स्थिति का आलम भयानक मंजर की ओर अग्रसर है और अब मार्केट खुलने के बाद भी पूरा वातावरण एवं व्यापारजगत दयनीय स्थिति से मुंह लटकाए बैठा है व तरह-तरह की परेशानियों का सामना कर रहा है।

राजधानी दिल्ली क्षेत्र की तो यहां पर एशिया का सबसे बड़ी होलसेल रेडीमेड गारमेंट मार्केट गांधीनगर क्षेत्र परिसर में लगभग 30 से 35 हजार दुकानें एवं फैक्ट्रियां हैं जिसमें अशोक बाजार, रेगमा रामनगर व सुभाष रोड़ के प्रमुख हैं व इस बाजार को अपनी अलग ही पहचान है परंतु इस वर्ष 2020 में इस गांधी नगर मार्केट को ग्रहण सा लग गया है। इसका मूल कारण यह है कि पहले यहां विधानसभा चुनाव में दंगा फसाद, एनआरसी और अब कोरोना वायरस ने तो मार्केट के व्यापार और व्यापारी भाइयों की कमर ही तोड़ दी है, यानी कि पूरा हिला कर रख दिया है।

 गारमेंट उत्पादक श्री बालाजी फैशन के डायरेक्टर श्री महेश कोठारी ने कहा कि आज वर्तमान परिस्थिति की बात करें तो गांधीनगर बाजार की हालत यह है कि दिल्ली के प्राय: सारे बाजार खुलने की पहल के बाद भी यहां पर 50 प्रतिशत मार्केट खुल पा रहा है, जो एक अपने आप में चिंताजनक विषय है। यहां पर बाजार से व्यापारी वर्ग का आना हो तो भी कैसे आए, कारण कि सुचारू रूप से आवागमन प्रभावित है और ऊपर से कोरोना महामारी का जो तांडव नृत्य हो रहा है, इससे पूरा व्यापार जगत तनावग्रस्त है और बची खुची कसर पूरी की यहां से मजदूर भाइयों का अपने गांव की और पलायन करना। कुछ मजदूर भाई साधन के अभाव के चलते अपने गांव की ओर जा नहीं जा पाए तो आज भी साधन जुटाकर अपने क्षेत्र की ओर जा रहे हैं। अब आने वाले समय 4 से 5 माह तक वापस लौट आना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन है। इससे गांधीनगर बाजार का भविष्य अंधकार की चपेट में नजर आता दिख रहा है। इन हालात से ट्रेडर्स और फैक्ट्री निर्माता दोनों तनावग्रस्त हैं।

आज मार्केट की सबसे बड़ी वर्तमान समस्या एक और भी है। वो यह है कि दुकानदार, फैक्ट्री मालिक, गोडाउन के किराएदार, इनको लॉकडाउन में बंद रहे बाजार का किराया चुकाना, जो इस हालात में किराएदार किराया चुकाने में अक्षम हैं। ऊपर से स्टाफ को पगार, मकान किराया, बिजली बिल से मध्यमवर्ग का आदमी दुकानदार की बुरी हालत नजर आ रही है। आने वाले समय में दुकान मालिक, फैक्ट्री मालिक एवं किराएदार के साथ आपसी तालमेल नहीं बढ़ा तो दुकानें, फैक्ट्रियां खाली होने की कगार पर आ जाएगी और गांधीनगर मार्केट का नाम और काम दोनों ही एक कहानी की तरह रह जाएगी। ऐसे में दुकान मालिकों को अपना दिल बड़ा करना ही होगा क्योंकि किराएदार की अब इससे ज्यादा विकट परिस्थिति सहन करने की क्षमता दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही है। इस मार्केट की ऐसी भयावह स्थिति को देखते हुए लुधियाना, सूरत, अहमदाबाद, कोलकाता, तिरूपुर, कानपुर, इरोड़, भिवंडी जैसी मण्डियों को भी सोचने को मजबूर होना पड़ेगा, क्योंकि इन सभी मंडियों का 30 से 40 प्रतिशत माल गांधीनगर बाजार में बिकने को आता है।

अन्त में प्रभु से यही प्रार्थना है कि इस कोरोना महामारी का जल्दी से जल्दी अंत करे एवं सभी व्यापारी भाइयों को इस दु:खद घड़ी में संबल शक्ति प्रदान करे।

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