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सूटिंग और शर्टिंग उत्पादकों के पास लॉकडाउन से पहले के ऑर्डर्स का भरपूर स्टॉक, लूमों पर उत्पादन शुरू

सूटिंग और शर्टिंग उत्पादकों के पास लॉकडाउन से पहले के ऑर्डर्स का भरपूर स्टॉक, लूमों पर उत्पादन शुरू

By: Textile World Date: 2020-07-06

थोक कपड़ा बाजार शुरू करने की मांग / अब ऑर्डर बुकिंग का पैटर्न बदला

मुंबई/ रमाशंकर पाण्डेय

बाजार खुलते ही लॉकडाउन से पहले के स्टॉक को व्यापारी निकालने की जुगत में लग गए हैं। रिपोर्ट लिखे जाने तक सी वार्ड स्थित थोक कपड़ा बाजार बंद है, परंतु बाजार के बाहर की दुकानें खुली है, धंधे में कोई दम नहीं है। ग्रे कपड़ों का भाव बीच में प्रति मीटर 4 से 5 रू टूटने के बाद फि र से एक रूपए तक सुधरा है। यार्न बाजार भी बंद है। डाइंग और प्रोसेसिंग इकाइयों में श्रमिकों की कमी होने से काम नहीं हो पा रहा है और जहां हो भी रहा है, कम हो रहा है। आलम यह है कि डाईंग एवं प्रोसेसिंग में रुके माल का कोई ठिकाना नहीं है। जिन कारोबारियों के सेल्स आफि स भिवंडी में है, वे मार्केटिंग कर रहे हैं। कुछ आर्डर भी आ रहे है तथा उनकी डिस्पेचिंग भी हो रही है। अब आर्डर बुकिंग के लिए व्यापारी सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं।

12 कपड़ा बाजार एसोसिएशनों की प्रतिनिधित्व वाली एक्शन कमेटी ऑफ  टेक्सटाइल टे्रडर्स एसोसिएशन ने थोक कपड़ा बाजार खोलने की अनुमति देने की मांग सरकार से की है। इस बारे में एक ज्ञापन सौंपा गया है। व्यापारियों की दलील है कि मार्केट के बाहर की दुकानें ऑड-ईवन आधार पर खुली है, इसके अलावा अन्यत्र स्थित मार्केट जैसे कि हिंदमाता, मनीष मार्केट, एल्को मार्केट, गोहिल शापिंग सेंटर्स, केवल इंडस्ट्रिएल इस्टेट खुले हुए हैं, अत: कपड़ा बाजार को भी खोला जाना चाहिए। कपड़े का कारोबार सीजन और बदलते फैशन के अनुसार चलता है। पीक सीजन में लॉकडाउन करने से रेडी स्टॉक बड़े पैमाने पर पड़ा है। इसकी ऑफ  सीजन में निकासी जल्द होनी चाहिए। मानसून सिर पर है तथा पानी भरने अथवा नमी से कपड़ों के खराब होने का भय है। व्यापारियों का कहना है कि अभी वित्तीय संकट में हैं। आगे के लिए सीजन मालों की तैयारी भी करनी है, कई तरह के अन्य कार्य भी पूरे करने हैं। ऐसे में बाजार नहीं खुलता है, तो दिक्कतें आनी स्वाभाविक है। सूरत खुला है। भिवंडी, इचलकरंजी इत्यादि जगहों पर काम हो रहे हैं। इचलकंरजी में जॉब वर्क की प्रति पीक दर एयरजेट लूम की आठ पैसे से बढ़कर नौ पैसे हो गई हैं। रेपियर लूम की दर 12 से 13 पैसा है। ग्रे कपड़ों का उठाव कम होने से भाव नरम रहे हैं। डोम्बीवली के प्रोसेस हाउसों में करीब 20 से 25 प्रतिशत प्रोसेस हाउसों में एक पाली में ही काम हो रहा है। कारीगरों की भारी तंगी चल रही है। यही हाल सूरत के प्रोसेस हाउसों का बताया जा रहा है। यहां के 20 प्रतिशत प्रोसेस हाउस सिर्फ  एक पाली में काम कर रहे हैं। समस्या वही श्रमिक की बताई जा रही है। ट्रांसपोर्ट में भी लेबर की समस्या है। इसलिए लोडिंग तथा अनलोडिंग में दिक्कतें आ रही है। यह सीजन यूनिफॉर्म का है। अब स्कूल 15 जुलाई से उन क्षेत्रों में खोलने का निर्णय लिया गया है, जहां कोरोना के मामले नहीं हैं। जहां रेड जोन है, वहां ऑनलाइन की व्यवस्था है। इस सीजन में कारोबार 20 से 25 फीसदी होने का अनुमान है। जिनके आफि स भिवंडी में हैं, वे अधिक से अधिक माल बेंचने की कोशिश कर रहे हैं। रेडी स्टॉक बेचा जा रहा है। व्यापारी आठ जून के बाद से सक्रिय हंै, परंतु कई कारणों से बाजार के पटरी पर लौटने में समय लगना तय है। महामारी में अधिक सावधानी बरतने के साथ कपड़ा निर्माताओं ने मास्क बनाने पर जोर दिया है। कइयों ने इस दिशा में अच्छी पहल की है और इसका बाजार में अब भरपूर स्टॉक जमा हो गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार भिवंडी में कपड़ों का उत्पादन धीमी गति से हो रहा है। लूम कारीगरों की कमी है। लॉकडाउन के समय भिवंडी से श्रमिकों के होते अधिक पलायन को देख श्रमिकों को यहां रोका किन्तु 21 मई को पावरलूम खोलने के आदेश दिए गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अब भिवंडी में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं और यह खबरें श्रमिकों तक पहुंच रही है, इसलिए उनके जल्दी लौटने की संभावना कम है। दूसरे, यार्न बाजार के बंद होने से जिनके पास पहले का यार्न है, ऐसे करीब 20 से 25 प्रतिशत लूमों पर ही कपड़ों का उत्पादन हो रहा है। जो यार्न इन उत्पादकों के पास है, उसी से ग्रे कपड़ा बनाया जा रहा है। मिलों की एयरजेट लूम पोपलीन 40/40,124/68, 63” पना का भाव 56.50 रू है, जो पहले 62 रू था।

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